उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग (यूपीएचईएससी) में एक साल से फंसी असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती का रास्ता जल्द ही खुल सकता है। मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में जाने के बाद आयोग में जल्द ही अध्यक्ष या नए सदस्य की नियुक्ति की जा सकती है।
उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग (यूपीएचईएससी) में एक साल से फंसी असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती का रास्ता जल्द ही खुल सकता है। मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में जाने के बाद आयोग में जल्द ही अध्यक्ष या नए सदस्य की नियुक्ति की जा सकती है। विज्ञापन संख्या-51 के तहत प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 1017 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी हुए एक साल हो गए हैं। अगस्त-2022 में आवेदन की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। फरवरी-2023 में आयोग के अध्यक्ष कार्यकाल पूरा हो चुका है और सदस्यों के भी छह में से चार पद खाली हैं । कोरम पूरा न होने से भर्ती फंसी हुई है।
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अगर आयोग में एक सदस्य की भी नियुक्ति हो जाती है, तो सदस्यों की संख्या बढ़कर तीन हो जाएगी और इन्हीं में एक वरिष्ठ सदस्य को अध्यक्ष नामित करते हुए भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी। नए अध्यक्ष या सदस्य की नियुक्ति में समय लग सकता है। ऐसे में पूर्व में सदस्य के एक पद के लिए जारी हुए विज्ञापन के तहत सदस्य की नियुक्ति की जा सकती है। दिसंबर-2020 में आयोग के तत्कालीन सदस्य डॉ. एसके पांडेय का कार्यकाल पूरा होने के बाद 2021 की शुरुआत में उनकी जगह नए सदस्य की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। तीन बार सर्च कमेटी की बैठक भी बुलाई गई, लेकिन किन्हीं कारणों से बैठक नहीं हो सकी। ऐसे में दिसंबर-2020 से पद खाली पड़ा हुआ है।
इस बीच भर्ती फंसने से परेशान अभ्यर्थी इलाहाबाद हाईकोर्ट चले गए हैं। मामले में कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है। प्रदेश सरकार ने अब तक नए शिक्षा सेवा चयन आयेाग का गठन भी नहीं किया है। आयोग के सूत्रों का कहना है कि सरकार जल्द ही किसी नए सदस्य की नियुक्ति कर सकती है, ताकि भर्ती की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।