वाहनों पर पुलिस, प्रेस, प्रशासन जैसी पदवियां लिखकर रूआब गालिब करने वालों के खिलाफ दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से जवाब मांग लिया है। कोर्ट ने पूछा है कि यूपी में हाईसिक्योरिटी नंबर प्लेट की व्यवस्था क्यों नहीं की गई है। वाहनों पर पदवियां लिखने या प्रभाव डालने वाले संकेतों का प्रयोग करने वालों के खिलाफ पुलिस क्या कार्रवाई कर रही है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र अग्निवेश की जनहित याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति डा. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। पीठ ने सरकार को निर्देश दिया है कि कोई भी व्यक्ति चाहे वह कितने ही ऊंचे पद पर क्यों न हो यदि मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन करता पाया जाता है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
याचिका में कहा गया है कि प्रदेश में तमाम लोग अपने दुपहिया और चार पाहिया वाहनों में पुलिस, प्रेस, हाईकोर्ट, अधिवक्ता, प्रशासन आदि लिखकर घूम रहे हैं। ऐसा करना मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत है। इसकी आड़ में तमाम अपराधी भी वाहनों में ऐसी पदवियां लिखकर अवैध काम करते हैं। इसी प्रकार का आरोप न्यायिक सेवा और प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों पर भी लगाया गया है। यहां तक कि परिवार में किसी व्यक्ति के रसूखदार पद पर होने पर उसके रिश्तेदार भी अपने वाहनों पर विभागों का नाम लिखते हैं जो कि गैरकानूनी है। यूपी में हाईसिक्योरिटी नंबर प्लेट का प्रावधान नहीं होने के कारण लोग ऐसा करते हैं। कोर्ट ने प्रदेश सरकार और परिवहन विभाग से इस मामले में चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है।