बाल विकास एवं शिक्षण विधि के प्रश्न
बाल विकास एवं शिक्षण विधि में पहला सवाल आसान से कठिन की ओर बढ़ने वाले शिक्षण सिद्धांत पर था। किशोरों की स्वायत्तता की आवश्यकता, भावनात्मक परामर्श और पढ़ने की खराब आदतों पर कई प्रश्न थे। सामाजिक चिंता, गणित सीखने में ठहराव और समावेशी स्कूल वातावरण भी प्रश्नों का हिस्सा थे। सुकरात की शिक्षण पद्धति और आधुनिक कक्षाओं में शिक्षक की भूमिका भी पूछी गई।
भाषा और सामाजिक अध्ययन के प्रश्न
हिंदी में वाक्य पहचान (मेज पर पुस्तक रखीं हैं ) और संज्ञा (भैंस का दूध कितने रुपये लीटर हैं) पर सवाल थे। तरंग, तुरंग जैसे युग्म शब्दों का अर्थ और चुल्लू भर पानी में डूब मरना मुहावरे का अर्थ भी पूछा गया। संस्कृत में आकाशम का पर्यायवाची और उपरि का विलोम शब्द चुनने को कहा गया। सामाजिक अध्ययन में वैदिक भारत में जनपद शब्द का अर्थ, प्राथमिक उपचार का क्रम और 86 वें सांविधानिक संशोधन के तहत मौलिक कर्तव्य पर प्रश्न थे।