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बीमारी फैला रहे अस्पताल, प्रदूषण विभाग ने लगाया जुर्माना

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झूंसी के खबरों से जुुड़ी फोटो - फोटो : JHUSI
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बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण में कोताही पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई
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89 से अधिक अस्पतालों को जुर्माने की नोटिस, मचा हड़कंप
हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका में की गई थी कार्रवाई की मांग
झूंसी। संगमनगरी के कई सरकारी और निजी अस्पताल बायो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण न कर बीमारी बांट रहे हैं। हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दिए गए आदेश के क्रम में बड़ी कार्रवाई की गई है। बोर्ड ने जांच में मानक के विपरीत पाए गए दस अस्पताल संचालकों से करीब 15 लाख रुपये जुर्माना वसूल किया है। वहीं 89 से अधिक अस्पताल और नर्सिंगहोम संचालकों को नोटिस भेजा गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई से अस्पताल संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है।
हाईकोर्ट में करीब पांच माह पहले वैशाली सिंह समेत ग्यारह अन्य ने जिले के अस्पतालों और नर्सिंगहोमों से निकलने वाले चिकित्सा अपशिष्ट (बायो मेडिकल वेस्ट) को नष्ट किए जाने में लापरवाही बरतने के मामले में जनहित याचिका दायर की थी। याचिका के साथ 42 नामचीन अस्पतालों से निकलने वाले चिकित्सा अपशिष्ट की तस्वीरें भी लगाई गईं थीं। बताया गया था कि अस्पताल, नर्सिंगहोम और पैथालॉजी से निकलने वाले कचरे से लगातार प्रदूषण बढ़ रहा है और बीमारी फैल रही है। अस्पताल संचालक इस ओर से लापरवाह बने हैं। याचिका स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को अस्पतालों और नर्सिंगहोमों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश दिए थे।
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हाईकोर्ट के आदेश पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एक्शन में आया। बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी जेबी सिंह के मुताबिक 37 अस्पतालों की जांच में 23 में चिकित्सा अपशिष्ट का निस्तारण सही पाया गया। दस निजी अस्पतालों पर जुर्माना लगाया गया है। इनके अतिरिक्त पंचशील हॉस्पिटल पर 49500, वीपी नैथॉनी अस्पताल में 68250 तथा मोहक मेडिकल एंड रिसर्च सेंटर पर भी 47250 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। अन्य अस्पतालों को जुर्माने की राशि के साथ नोटिस भेजा गया है। इनमें करछना, मेजा, कोरांव, हंडिया, फूलपुर, सोरांव और बारा के दर्जनों निजी अस्पताल शामिल हैं।
जिले में 414 अस्पताल दर्ज, कई बिना सूचना हो रहे संचालित
झूंसी। प्रदूषण विभाग में प्रयागराज के कुल 414 अस्पताल और नर्सिंग होम पंजीकृत हैं। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब अस्पतालों से निकलने वाले चिकित्सा अपशिष्ट को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एक-एक अस्पताल की जांच में कर रहा है। शहर के अलावा नैनी, झूंसी और फाफामऊ में हाईवे से लेकर आवासीय कॉलोनियों में सैकड़ों अस्पताल चिकित्सा अपशिष्ट नष्ट करने में लापरवाही बरत रहे हैं। इसके अलावा गांवों में कई अस्पताल अभी तक प्रदूषण विभाग नजर में ही नहीं हैं।
नैनी और हंडिया में मेडिकल वेस्टेज को किया जाता है नष्ट
झूंसी। यमुनापार के नैनी और गंगापार के हंडिया इलाके में अस्पतालों से निकलने वाले चिकित्सा अपशिष्ट को नष्ट करने के लिए सेंटर बनाया गया है। यहां के सेंटरों का शहर के विभिन्न अस्पतालों से अनुबंध है। अनुबंध के तहत सेंटर के कर्मचारी अस्पतालों से अपशिष्ट एकत्र करते हैं और बाद में उसे सेंटर पर ले जाकर नष्ट करते हैं। इन्हें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से आदेश लेना होता है।
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निजी अस्पतालों में बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण की व्यवस्था न होने से प्रदूषण फैल रहा है। कई ऐसे अस्पताल हैं, जो मानक के खिलाफ चल रहे हैं। इसी क्रम में प्रदूषण विभाग ने जांच के बाद कार्रवाई की है। अस्पतालों पर जुर्माना लगाने के साथ जुर्माना आरोपित भी किया गया है।
ई. जेबी सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण बोर्ड, प्रयागराज
इन अस्पतालों से वसूला गया है जुर्माना
अस्पताल का नाम जुर्माना राशि
1-वीरेंद्र हॉस्पिटल, सिविल लाइंस 152635 रुपये
2-फीनिक्स हॉस्पिटल, टैगोर टाऊन 393730 रुपये
3-कमला हेल्थ सेंटर 144375 रुपये
4-शिव मेमोरियल हॉस्पिटल, नैनी सवा लाख रुपये
5-नाजरेथ हास्पिटल, कमला नेहरू रोड सवा दो लाख रुपये
6-कमला नेहरू मेमोरियल हॉस्पिटल पचास हजार रुपये
7-आनंद हॉस्पिटल 25620 रुपये
8-मोहक हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर 47250 रुपये
9-ईएसआई हॉस्पिटल, नैनी 275000 रुपये
10-एमएलएन देव, काल्विन रोड 52500 रुपये
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