वेतन पर खर्च हो रहे करोड़ों रुपये
नियुक्ति करने का तरीका गजब था। पहले रिक्त पद के सापेक्ष भर्ती करते और एक महीने बाद उसका तबादला कर देते। फिर उसी पद पर दूसरे को नियुक्त कर लेते। ऐसे ही कई जिलों में एक- दो रिक्त पदों के सापेक्ष कई भर्तियां हुई। आरोप लग कि मामले में प्रधानाचार्य से लेकर निदेशक तक मिलीभगत थी। बाद में इसकी शिकायत हुई। उसके बाद तत्कालीन निदेशक हरिशंकर पांडेय ने मामले की जांच के लिए अपर निदेशक राहुल देव, वित्त नियंत्रक जेके पांडेय और वरिष्ठ शोध अधिकारी डीके प्रसाद की टीम बनाई।
तीनों अधिकारियों ने 166 पेज की जांच रिपोर्ट साैंपी। निदेशक हरिशंकर पांडेय ने 11 अगस्त 2010 को दोषियों के खिलाफ रिपोर्ट शासन को भेज दी। उन्होंने लिखा कि निदेशक डाॅ. गुरुदीप सिंह और अपर निदेशक दिलीप कुमार के साथ मिलकर 20 आईटीआई के प्रधानाचार्य व सेवायोजन अधिकारियों ने 438 लोगों की अनियमित नियुक्ति की है।
लिखा कि अवैध धन वसूली करके अयोग्य अभ्यर्थियों की नियुक्ति कर दी गई है। इससे शासन को गंभीर वित्तीय क्षति पहुंच रही है। उन्होंने नियुक्ति निरस्त करने और अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की थी। लेकिन, अब तक कार्रवाई नहीं हुई। इन सभी के वेतन पर हर महीने करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं।