प्रयागराज से कानपुर तक 12 हजार साल पुरानी जलधारा मिली है। अलग-अलग स्थानों से प्राप्त किए गए पानी और अन्य पदार्थों के नमूने की उम्र बराबर निकली है। एनजीआरआई हैदराबाद के वैज्ञानिकों ने कार्बन डेटिंग के जरिए अनुमान लगाया है।
साल 2018 से सरस्वती नदी की खोज का काम अंतिम चरण में है। राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (एनजीआरआई) हैदराबाद के वैज्ञानिकों के निर्देशन में प्रयागराज, कौशाम्बी, कुंडा, फतेहपुर होते हुए कानपुर तक ड्रिलिंग के माध्यम से जो जलधारा के नमूने लिए गए, उनकी उम्र 12000 साल से भी पुरानी होने का अनुमान है।
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एनजीआरआई हैदराबाद व डेनमार्क के वैज्ञानिकों ने वर्ष 2018 में फरवरी से मार्च के बीच विलुप्त सरस्वती की खोज संगम (प्रयागराज) से शुरू की थी। हेलिकॉप्टर के नीचे लगे हेलिबोन ट्रांजिएंट इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिस्टम से प्रयागराज, कौशाम्बी, फतेहपुर व कानपुर के बिल्हौर तक जमीन के भीतर सर्वे किया था।
वहीं, केंद्रीय भू जल बोर्ड (सीजीडब्लयूबी) के वैज्ञानिकों की यूनिट ने मार्च-2020 से प्रयागराज के बमरौली, कौशाम्बी के सेंवथा, इछना, म्योहर समेत दो दर्जन स्थानों से आगे फतेहपुर और कानपुर के बिल्हौर व गजनेर तक 100 से 150 मीटर गहराई में बोरवेल ड्रिलिंग की।
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इस दौरान जमीन के भीतर मिले सेडिमेंट कोर (कीचड़, कंकड़, रेत और पानी) के नमूने कार्बन डेटिंग के लिए एकत्रित किए गए। एनजीआरआई के वैज्ञानिक डॉ. सुभाष चंद्रा ने बताया कि ड्रिलिंग में मिले पानी की उम्र का पता लगाने संबंधी शोध अंतिम चरण में पहुंच चुका है।
उन्होंने एनजीआरआई हैदराबाद में हुए रिसर्च को सार्वजनिक (पब्लिक डोमेन में लाने) करने से मना किया। सिर्फ इतना बताया कि ड्रिलिंग में अलग-अलग जगहों की जलधारा की उम्र 12 हजार साल से अधिक हो सकती है।
गंगा-यमुना नदी से कनेक्टिविटी पर चल रहा शोध
वैज्ञानिकों के लाइव प्रतिरोधकता मैप परिक्षेत्र के अब तक के अध्ययन में नदी की सहायक शाखा कौशाम्बी में टेढ़ी-मेढ़ी होकर परवेजपुर स्थित यमुना में मिलती है। यह 45 किलोमीटर लंबी और चार से छह किलोमीटर चौड़ी है। वहीं, नदी की मुख्य शाखा कौशाम्बी से 160 किलोमीटर आगे कानपुर के गजनेर तक मिली है।
फतेहपुर के खागा से निकली मुख्य शाखा से एक और शाखा बिंदकी, देवकली होते हुए बिल्हौर मिली है।जबकि, उत्तर पश्चिम स्थित कसेरुआ गांव से दूसरी सहायक शाखा आंशिक रूप से गंगा नदी को नीचे से पार करती है।
जो दावतपुर, कटरी, दुलीखेड़ा, अशिकपुर होते हुए साटन गांव पहुंचती है। इसी शाखा से निकली एक और शाखा मुड़कर कौशाम्बी के अफजलपुर सातों, सुल्तानपुर से होकर गंगा नदी के नीचे से प्रतापगढ़ के कुंडा जाती है।