मुआवजे की अर्जी पर कार्रवाई न होना गंभीर मामला, डीजीपी से जवाब तलब
मूल मामले में याची के अधिवक्ता ने विपक्षी को मिली जमानत रद्द करने की मांग की। दलील दी कि विपक्षी को जमानत देते समय उसके पिता की ओर से 15 लाख रुपये जमा करने का आश्वासन दिया गया था। जबकि जमानत मिलने के बाद भी तय आश्वासन के अनुसार 15 लाख रुपये जमा नहीं किए। वहीं, विपक्षी के वकील ने दलील दी कि उसके पिता ने वास्तविक लेन-देन की पूरी जानकारी के बिना यह आश्वासन दिया था। इसलिए अब 15 लाख रुपये जमा करने की शर्त में बदलाव करने संबंधी संशोधन अर्जी दाखिल की गई है।
साथ ही यह आरोप लगाया कि पुलिस विपक्षी और उसके परिवार को परेशान कर रही है। उसे गैंगस्टर एक्ट के एक अन्य मामले में गिरफ्तार कर लिया। इस अवैध गिरफ्तारी के लिए कोर्ट की ओर से दिए गए एक लाख रुपये मुआवजे के आदेश का अनुपालन डीएम ने अब तक नहीं किया, जबकि मुआवजे की अर्जी दी जा चुकी है। कोर्ट ने कहा कि डीएम के समक्ष मुआवजे के लिए दिए गए आवेदन पर कार्रवाई नहीं होना गंभीर मामला है। कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक से जवाब तलब किया है। पूछा है कि 19 फरवरी के आदेश के अनुपालन में संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।