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UPPSC : आयोग के लिए यूपी, अभ्यर्थियों के लिए बिहार उच्चतम घनत्व वाला राज्य

Mon, 04 Aug 2025 06:56 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

भारत में निम्नलिखित में से कौन से राज्य में उच्चतर जनसंख्या घनत्व पाया है? उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने आरओ/एआरओ प्रारंभिक परीक्षा-2023 में पूछे गए इस सवाल का सही जवाब उत्तर प्रदेश बताया है जबकि अभ्यर्थियों का दावा है कि सही जवाब बिहार होगा।
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यूपीपीएससी। UPPSC - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारत में निम्नलिखित में से कौन से राज्य में उच्चतर जनसंख्या घनत्व पाया है? उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने आरओ/एआरओ प्रारंभिक परीक्षा-2023 में पूछे गए इस सवाल का सही जवाब उत्तर प्रदेश बताया है जबकि अभ्यर्थियों का दावा है कि सही जवाब बिहार होगा।

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अभ्यर्थियों ने साक्ष्य के तौर पर एनसीईआरटी व सेंसस ऑफ इंडिया के आंकड़ों का हवाला दिया है। यूपीपीएससी की ओर से 30 जुलाई को जारी उत्तरकुंजी पर अभ्यर्थियों से पांच अगस्त तक आपत्तियां मांगी गईं हैं। अब तक अभ्यर्थियों ने एक दर्जन सवालों पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं हैं। एक प्रश्न था कि निम्नलिखित में किस राजा का कथन है कि ‘हमारी सारी प्रजा सत्कर्मों को सृजन करती है, समस्त आपदाओं से मुक्त, ईश्वर से अकलुषित मनों से आनंद का भोग करे’?

आयोग ने इसका सही उत्तर हर्षवर्धन माना है जबकि अभ्यर्थियों दावा है कि यह कथन अशोक का था। साक्ष्य के तौर पर भारत सरकार के अरकाइव वेबसाइट में दिए गए तथ्याें का हवाला दिया गया है। इस सवाल पर भी आपत्ति आई है कि उत्पादन की दृष्टि से भारत में किस फल का प्रथम स्थान है? आयोग ने सही उत्तर केला माना है जबकि अभ्यर्थियों का दावा है कि इसका सही जवाब आम होगा। अभ्यर्थियों ने कृषि और प्रसंस्करण खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्रधिकरण के हवाले से साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं।
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इस सवाल के जवाब पर भी आपत्ति आई है कि निम्नलिखित में से कौन सी एक रबी की दलहनी फसल नहीं है। आयोग ने मूंग को सही जवाब माना है जबकि अभ्यर्थियों का दावा है कि सही जवाब सेम की फली (फ्रेंच बीन) होगी। अभ्यर्थियों ने सरकारी वेबसाइट और कृषि विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं। इसके अलावा भी कई अन्य सवालों पर आपत्तियां दर्ज कराई गईं हैं।

प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों पर कार्रवाई की मांग

प्रतियोगी छात्र राजन व अन्य अभ्यर्थियों ने प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों पर कार्रवाई की मांग की है। अभ्यर्थियों का कहना है कि किताब/वेबसाइट/पत्रिका आदि देखने के बाद भी विशेषज्ञ सही प्रश्न नहीं बना पाते हैं। जब तक इन विशेषज्ञों के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं होगी, अभ्यर्थियों को इसका नुकसान उठाना पड़ेगा और आयोग की छवि भी धूमिल होती रहेगी। कभी-कभी प्रश्न डिलीट करने से योग्य अभ्यर्थियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है।

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