आज से यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का बहिष्कार किया जाएगा। प्रदेश भर के शिक्षक संगठनों ने कॉपी जांचने में लगे शिक्षकों से यह अपील की है। मृतक शिक्षक के परिवार की सहायता के लिए की गई मांगों पर निर्धारित समय में शासन की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि मामले में सरकार की उदासीनता दुर्भाग्यपूर्ण है।
राजकीय इंटर कॉलेज प्रयागराज में शुक्रवार को शिक्षक संगठनों की बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि जब तक शासन मांगें नहीं मानता, तब तक मूल्यांकन का बहिष्कार जारी रहेगा। आश्रित परिवार के लिए शिक्षक संगठनों की तरफ से कई मांगे की गई थीं। इसमें दो करोड़ रुपये की विशेष आर्थिक सहायता, मृतक शिक्षक की पत्नी को पेंशन के रूप में शिक्षक की शेष सेवा का पूरा वेतन, राजकीय हाईस्कूल महगांव, वाराणसी का नाम मृतक शिक्षक के नाम पर किए जाने व उत्तर पुस्तिकाओं को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के कार्य से शिक्षकों को मुक्त करने की मांग शामिल थी।
17 मार्च की रात वाराणसी से मुजफ्फरनगर कॉपियां ले जा रहे शिक्षक की उसी के साथ सुरक्षा में लगे सिपाही ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद प्रदेश भर में शिक्षकों ने 18 मार्च को मूल्यांकन का बहिष्कार किया था। आश्रित परिवार की मदद के लिए मांगों के साथ मूल्यांकन फिर से शुरू हो गया था। सरकार को मांगें मानने के लिए शुक्रवार तक का समय दिया गया था। समय सीमा बीत जाने के बाद भी शासन की तरफ से कोई जवाब न आने पर मूल्यांकन के बहिष्कार का फैसला लिया गया है।
उप्र माध्यमिक शिक्षक संगठन (ठकुराई गुट) के प्रदेश महामंत्री लाल मणि द्विवेदी ने कहा कि शिक्षकों के प्रति सरकार का रवैया संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। परिवार को दिए गए 25 लाख रुपये पर्याप्त नहीं हैं। इस मामले पर प्रदेश के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री की तरफ से कोई बयान नहीं आया है। हम मूल्यांकन में लगे प्रदेश के सभी शिक्षकों से अपील करते हैं कि मूल्यांकन का पूर्ण बहिष्कार करें और मृतक शिक्षक के परिवार के प्रति संवेदना दिखाएं।