यूपी बोर्ड की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा का परिणाम अप्रैल के अंतिम सप्ताह तक घोषित होगा। उम्मीद है कि परीक्षा परिणाम भी बोर्ड परीक्षा जैसा ही होगा। बोर्ड परीक्षा के दौरान अबकी बार नकल रोकने के लिए लगे दस्ते बेअसर रहे, परीक्षा के दौरान बहुत कम सख्ती के चलते अबकी नकलची भी बहुत कम पकड़े गए। प्रशासनिक अधिकारियों, बोर्ड के अधिकारियों और जिला विद्यालय निरीक्षकों की ओर बहुत बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। प्रधानाचार्यों एवं बोर्ड के जानकारों का मानना है कि अबकी बार यूपी बोर्ड का परीक्षा परिणाम 2018 से भी अच्छा रहने की उम्मीद है। ऐसे में उम्मीद है कि अबकी बार परीक्षा में सभी की नैया पार हो जाएगी।
प्रदेश की योगी सरकार के कार्यकाल में 2018 में हुई बोर्ड परीक्षा में खूब सख्ती बरती गई, परीक्षा के दौरान बरती गई सख्ती के चलते परीक्षार्थियों, शिक्षकों एवं प्रधानाचार्यों को आशंका थी कि परीक्षा परिणाम खराब आएगा। मूल्यांकन के बाद जब यूपी बोर्ड की ओर से हाईस्कूल-इंटरमीडिएट परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ तो यह एकदम उलट रहा। बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों को उम्मीद से अधिक अंक मिले। अब 2019 का परीक्षा परिणाम लोकसभा चुनाव के बीच में आ रहा है, ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि सरकार परीक्षा परिणाम में पिछले वर्ष की ही तरह लचीला रूख अपनाएगी।
मूल्यांकन में लगे शिक्षकों ने बताया कि प्रदेश सरकार ने इसीलिए उनकी मूल्यांकन भत्ता बढ़ाने की मांग भी मान ली, जिससे शिक्षकों की नाराजगी से बचा जा सके। शिक्षकों ने भी मूल्यांकन के दौरान खूब अंक दिए हैं, ऐसे में उम्मीद है कि इस बार अंकों के सरलीकरण के बाद परीक्षार्थियों पर अंक बरसेंगे। चुनाव के समय परीक्षार्थियों की नाराजगी से बचने के लिए बोर्ड की ओर से एक अच्छा रिजल्ट देने की तैयारी है।
बोर्ड परीक्षा में 58 लाख परीक्षार्थी शामिल
यूपी बोर्ड की हाईस्कूल-इंटरमीडिएट परीक्षा में कुल 58 लाख से अधिक परीक्षार्थी शामिल हुए। बोर्ड की ओर से उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन का काम 25 मार्च तक पूरा हुआ। कुल 3.20 करोड़ कॉपी का मूल्यांकन किया गया, इसमें 1.90 करोड़ हाईस्कूल एवं 1.30 करोड़ इंटरमीडिएट कॉपी का मूल्यांकन किया गया।