यूपी बोर्ड परीक्षा केंद्र बनाने के लिए पहले चरण की तैयारी में मिली खामियां
प्रयागराज। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल-इंटरमीडिएट परीक्षाओं को नकल विहीन कराने केलिए शासन और बोर्ड का पूरा प्रयास फेल होता नजर आ रहा है। बोर्ड की ओर से ऑनलाइन निगरानी सिस्टम में सेंध लगाकर व्यवस्था से जुड़े लोग जिले की सूची में अपना नाम शामिल करवाने में सफल हो गए हैं। बोर्ड के प्रयास के बाद भी प्रदेश के अधिकांश स्कूलों ने राउटर, हाईस्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्शन और सीसीटीवी कैमरे नहीं लगवाए। व्यवस्था लागू नहीं करने वालों में राजकीय और वित्तविहीन स्कूलों की संख्या सबसे ज्यादा है। संसाधन न होने के कारण बोर्ड ने बड़ी संख्या में स्कूलों को 50 में से जीरो नंबर दिए हैं।
फरवरी 2020 में यूपी बोर्ड परीक्षाएं होनी हैं। इससे पहले केंद्रों का निर्धारण ऑनलाइन किया जाना है, जिसके लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद ने सभी स्कूलों से अपने यहां बिजली, पानी, फर्नीचर, सीसीटीवी कैमरा, डीवीआर, राउटर, रेकॉर्डर आदि संसाधनों की उपलब्धता की जानकारी अपलोड करने के निर्देश दिए थे। इन संसाधनों के आधार पर ही स्कूलों को मिले अंक के आधार पर ही केंद्र बनाए जाने हैं, यूपी बोर्ड पहुंच रही सूचनाओं को मानें तो प्रदेश के 30 प्रतिशत से अधिक स्कूलों में अभी तक सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं। कई स्कूल ऐसे हैं जहां हर कमरे में एक ही कैमरा और वायस रेकॉर्डर मिला, जबकि हर कमरे में दो कैमरे और वायस रेकॉर्डर होना अनिवार्य है।
राउटर और ब्रॉडबैंड नहीं लगाने पर बोर्ड सचिव ने उठाए सवाल
नकल विहीन परीक्षाएं करवाए जाने और उसकी वेबकास्टिंग के जरिए मॉनिटरिंग के लिए वायस रेकॉर्डर युक्त सीसीटीवी कैमरे के डीवीआर के साथ राउटर डिवाइस लगाना अनिवार्य है। बोर्ड सचिव की ओर से भी 30 अक्तूबर को पत्र जारी करके जिला विद्यालय निरीक्षकों से राउटर एवं ब्राडबैंड की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी थी। राउटर एवं ब्राडबैंड के लिए बोर्ड ने सबसे अधिक 50 अंक तय किए हैं। सभी परीक्षा केंद्रों के डीवीआर का आईपी एड्रेस उनकी यूजर आईडी और पासवर्ड डीआईओएस के पास रहेगा। इसके जरिए जिले स्तर पर बने कंट्रोल रूम से एक क्लिक में हर परीक्षा केंद्र से सीधे प्रसारण किया जा सकेगा। राउटर और ब्रॉडबैंड कनेक्शन के बगैर यह सिस्टम काम नहीं करेगा। परीक्षा से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि जिन स्कूलों में संसाधनों की कमी है, उन्हें पूरा करवाने के निर्देश दिए गए हैं। परीक्षा केंद्र बनने के बाद संबंधित स्कूलों का फिर से निरीक्षण कर व्यवस्था ठीक करवाई जाएंगी।