इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने पुलिस भर्ती बोर्ड उत्तर प्रदेश को निर्देश दिया है कि वह 28916 पदों पर कांस्टेबलों की सीधी भर्ती के मामले में यूपी बोर्ड के अलावा अन्य बोर्डों से डिग्री लेने वाले अभ्यर्थियों पर चार सप्ताह में निर्णय ले। भर्ती बोर्ड ने बाहर के कई बोर्डों से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की डिग्री लेने वाले अभ्यर्थियों को चयन में शामिल करने से इंकार कर दिया है। इसके खिलाफ विष्णु तंवर और गौरव बलियान सहित दर्जनों अभ्यर्थ्यों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की है। याचिका पर न्यायमूर्ति बी अमित स्थालेकर ने सुनवाई की।
याची के अधिवक्ता विजय गौतम के मुताबिक 28196 पदों पर नागरिक पुलिस और पीएसी में कांस्टेबलों की भर्ती के लिए 2015 में विज्ञापन निकाला गया। इसमें सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त किसी बोर्ड से हाईस्कूल और इंटर मीडिएट की डिग्री या उसके समकक्ष डिग्री मांगी गई थी। याचीगण ने बोर्ड ऑफ हायर सेकेंडरी दिल्ली, सेंट्रल बोर्ड ऑफ एजूकेशन अजमेर, मध्य प्रदेश बोर्ड आदि से हाईस्कूल, इंटरमीडिएट किया है। उन्होंने भर्ती के लिए ऑन लाइन आवेदन किया था। भर्ती बोर्ड ने चार अप्रैल 2016 को कट ऑफ मेरिट जारी की। अन्य लोगों के साथ ही याचीगण को भी शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए बुलाया गया।
इसमें उत्तीर्ण होने के बाद हर वर्ग की अलग से कट ऑफ मेरिट जारी की गई। याचीगण को प्रवेश पत्र निर्गत करते हुए मेडिकल और मूल प्रमाणपत्रों की जांच के लिए बुलाया गया। भर्ती बोर्ड ने बाहर की डिग्रियां होने के आधार पर उन सभी को चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया। कहा गया कि विज्ञापन में सिर्फ एक शर्त थी कि डिग्री सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त बोर्ड या उसके समकक्ष होने चाहिए उसमें किसी राज्य का प्रतिबंध नहीं है। याचीगण की डिग्रियां मान्यता प्राप्त बोर्ड की हैं इसलिए उनको चयन में शामिल किया जाए। कोर्ट ने पुलिस भर्ती को बोर्ड को निर्देश दिया है कि इस मामले में चार सप्ताह में नियमानुसार निर्णय ले।