इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली बार एसोसिएशन को उत्तर प्रदेश बार कौंसिल की ओर से दी गई संबद्धता को लेकर दाखिल याचिका का निस्तारण कर दिया है। कोर्ट ने बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ताओं की ओर से दाखिल आपत्ति पर कानून के अनुसार दो महीने के भीतर निर्णय लिया जाए।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली बार एसोसिएशन को उत्तर प्रदेश बार कौंसिल की ओर से दी गई संबद्धता को लेकर दाखिल याचिका का निस्तारण कर दिया है। कोर्ट ने बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ताओं की ओर से दाखिल आपत्ति पर कानून के अनुसार दो महीने के भीतर निर्णय लिया जाए। साथ ही, याचियों और बरेली बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने ''एडवोकेट बार एसोसिएशन जिला बरेली व अन्य'' की याचिका पर दिया।
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याचिका में बरेली बार एसोसिएशन को दी गई संबद्धता को चुनौती दी गई थी। याचियों का कहना था कि संबंधित एसोसिएशन ने उत्तर प्रदेश बार कौंसिल के मॉडल बायलॉज और जारी परिपत्रों के अनुसार आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए हैं। इसके बावजूद, केवल हलफनामे पर आश्वासन लेकर संबद्धता प्रदान कर दी गई।
याचियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि संबद्धता को लेकर बार कौंसिल के समक्ष पहले ही आपत्ति दाखिल की जा चुकी है लिहाजा उसका कानून के अनुसार निस्तारण किया जाए। बरेली बार एसोसिएशन की ओर से कहा गया कि उनकी एसोसिएशन वर्ष 1984 से ‘सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट’ के तहत पंजीकृत एक पुरानी संस्था है। उन्होंने याचियों के आपत्ति दर्ज कराने के अधिकार पर भी सवाल उठाया। बार कौंसिल की ओर से कहा गया कि यदि आपत्ति दाखिल की गई है तो उस पर दोनों पक्षों को सुनकर कानून के अनुसार उचित निर्णय लिया जाएगा।