बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने सेंट्रल बार एसोसिएशन, लखनऊ के अध्यक्ष अखिलेश जायसवाल और महामंत्री अवनीश दीक्षित का अधिवक्ता पंजीकरण निलंबित कर उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने सेंट्रल बार एसोसिएशन, लखनऊ के अध्यक्ष अखिलेश जायसवाल और महामंत्री अवनीश दीक्षित का अधिवक्ता पंजीकरण निलंबित कर उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है। दोनों के खिलाफ मामला सुनवाई के लिए अनुशासन समिति को सौंपा गया है।
विज्ञापन
बार कौंसिल की आठ सितंबर को वर्चुअल बैठक में पूर्व अध्यक्ष देवेंद्र मिश्र नगरहा के प्रस्ताव पर इस मामले में गंभीरता से विचार किया गया। कहा गया कि बार कौंसिल की 23 अगस्त 2026 की सामान्य बैठक में इलाहाबाद हाईकोर्ट, लखनऊ की ओर से सेंट्रल बार एसोसिएशन के चुनाव के संबंध में पारित आदेश और एल्डर्स कमेटी के गठन के संबंध में निर्णय लिया गया था। इसी के तहत एल्डर्स कमेटी को चुनाव कराने के लिए अधिकृत किया गया था। बार कौंसिल के पांच सदस्यों के पर्यवेक्षण में चुनाव कराने के निर्देश भी दिए गए थे।
प्रस्ताव में आरोप लगाया गया कि बार कौंसिल के निर्णय को सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और महामंत्री ने अपने सदन में रखकर खारिज कर दिया, जिसे बार कौंसिल ने असांविधानिक बताया। इसे अधिवक्ता अधिनियम-1961 की धारा-35 के तहत व्यासायिक कदाचार माना गया है। बार कौंसिल ने दोनों पदाधिकारियों का अधिवक्ता पंजीकरण निलंबित कर कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही उन्हें अपना पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है। मामले को अध्यक्ष शिवा किशोर गौड़ और प्रतिनिधि सदस्य श्रीनाथ त्रिपाठी की अनुशासन समिति को सौंपा गया है, जो सुनवाई के बाद उचित आदेश पारित करेगी।