टिकट बंटवारे के साथ सपा की बढ़ी मुसीबत
टिकट बंटवारे के साथ सपा नेताओं की परेशानी भी बढ़ गई है। वरिष्ठ नेताओं के सामने भीतरघात को संभालने की चुनौती तो खड़ी हो ही गई है, टिकट नहीं मिलने से नाराज कई दिग्गजों के दूसरे दलों में चले जाने से जातीय समीकरण को साधने की कवायद को भी झटका लगा है।
पार्टी को बुधवार को बड़ा झटका लगा। पूर्व सांसद नागेंद्र पटेल ने भाजपा गठबंधन में शामिल अपना दल एस का दामन थाम लिया। अपना दल एस ने उन्हें कौशाम्बी के चायल से प्रत्याशी भी बनाया है।
खासतौर पर, गंगापार में पटेल मतदाताओं की बड़ी संख्या है, लेकिन सपा ने क्षेत्र की किसी भी सीट से इस बिरादरी के नेता को उम्ममीदवार नहीं बनाया है। इस तरह से नागेंद्र के अपना दल में चले जाने से सपा के सामने पटेल मतदाताओं को मनाने की चुनौती होगी। इस सियासी उठापटक के बीच पटेल बिरादरी में पकड़ रखने वाले अपना दल कमेरावादी की नाराजगी ने पार्टी की मुसीबत और बढ़ा दी है।
इनके अलावा हंडिया विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में लंबे समय तक मजबूत दखल रखने वाले महेश नारायण सिंह के पुत्र एवं पूर्व विधायक प्रशांत सिंह ने भी बुधवार को भाजपा गठबंधन में शामिल निषाद पार्टी का दामन थाम लिया।
निषाद पार्टी ने प्रशांत को हंडिया से उतारा
निषाद पार्टी ने प्रशांत को हंडिया से उम्मीदवार बनाकर सपा की राजनीति को चोट करने की कोशिश की है। कोरांव विधानसभा क्षेत्र में आदिवासी तथा अनुसूचित जाति बिरादरी के मतों में मजबूत पकड़ रखने वाले पूर्व विधायक राजमणि कोल के भी कांग्रेस में चले जाने से भी पार्टी को बड़ा झटका लगा है।
हालांकि पार्टी ने कोल बिरादरी के लिए रामदेव निडर को कोरांव से प्रत्याशी बनाकर जातिगत आंकड़ों को साधने की कोशिश की है। बुधवार को पश्चिमी से अमरनाथ मौर्य को टिकट दिए जाने के बाद भी पार्टी के भीतर नाराजगी सामने आने लगी है। टिकट के लिए दावेदारी करने वाले कई नेताओं ने अमरनाथ को प्रत्याशी बनाए जाने पर नाराजगी जताई है।
इससे पहले मेजा, शहर उत्तरी के उम्मीदवारों के खिलाफ भी कई नेता शीर्ष नेतृत्व से नाराजगी जता चुके हैं। सोशल मीडिया पर भी मुहिम छेड़ रखे हैं। ऐसे में पार्टी के नेताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने को ही मनाने तथा जातीय समीकरण को साधने की चुनौती है।