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UP : अतीक-अशरफ की हत्या के बाद अस्पतालों पर शासन की नजर, लगाए जाएंगे सीसीटीवी कैमरे

Sun, 28 May 2023 04:17 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इन सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से लखनऊ में बैठे अधिकारी अस्पताल की हर गतिविधि पर नजर रखेंगे। इसकी शुरूआत तेज बहादुर सप्रू अस्पताल से हुई है, जहां 16 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
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सीसीटीवी कैमरा। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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माफिया अतीक अहमद और अशरफ की कॉल्विन अस्पताल परिसर में हत्या होने के बाद सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं पर भी उच्चाधिकारियों की नजर है। इसको देखते हुए अब सभी सरकारी अस्पतालों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की तैयारी है। इतना ही नहीं इन सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से लखनऊ में बैठे अधिकारी अस्पताल की हर गतिविधि पर नजर रखेंगे। इसकी शुरूआत तेज बहादुर सप्रू अस्पताल से हुई है, जहां 16 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।

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वैसे सीसीटीवी कैमरे लगाने के पीछे डॉक्टरों और कर्मचारियों की मनमानी भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। सभी अस्पतालों की ओपीडी, पर्चा काउंटर, पैथोलाजी और एक्सरे कक्ष में उच्च तकनीकी के सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। इनके जरिये लखनऊ में बैठे अधिकारी एक क्लिक पर अस्पताल का हाल देख सकेंगे। अगर कोई कर्मचारी या डॉक्टर अपनी जगह से गायब है तो उसके ऊपर आसानी से कार्रवाई हो सकेगी।

इस अभियान की शुरुआत प्रयागराज में बेली अस्पताल से हो गई है। यहां एक सप्ताह पहले ही 16 सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके हैं। सभी ओपीडी इन कैमरों की निगरानी में हैं। इसके अलावा दवा काउंटर, एक्सरे और पैथोलाजी में भी कैमरे लग गए हैं। इसका नतीजा यह हो रहा है कि डॉक्टर व कर्मचारी बिना कारण बताए काम के दौरान गायब नहीं हो पा रहे हैं। उनको इस बात का एहसास है कि अगर ऊपर बैठे अधिकारियों को इसकी जानकारी हुई तो उनपर कार्रवाई होना तय है।

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डफरिन और कॉल्विन में जल्द लगेंगे कैमरे

तेज बहादुर सप्रू अस्पताल के बाद डफरिन और कॉल्विन अस्पताल में कैमरे लगाने की तैयारी है। इन अस्पतालों के सभी विभागों और ओपीडी में कैमरे लगेगें। अधिकारियों ने बताया कि इन कैमरों को चौबीस घंटे चालू रखा जाएगा। अगर कैमरे बंद होते हैं तो उसका कारण बताना पड़ेगा। लखनऊ में बैठे अधिकारी ऑनलाइन इन कैमरों के माध्यम से अस्पताल की हर एक गतिविधि पर नजर रखेंगे।

यहां पर एक सप्ताह पहले ही 16 कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों को सभी विभागों में लगाया गया है। वहीं, डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों को बता दिया गया है कि कुर्सी छोड़ने से पहले कारण बताना होगा। लखनऊ के अधिकारी अस्पताल की प्रत्येक गतिविधि पर निगाह बनाए हुए हैं। - डॉ. एमके अखौरी, अधीक्षक, तेज बहादुर सप्रू अस्पताल (बेली)
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