माघ मेले में संगम की रेती पर सनातन धर्म की रक्षा के लिए महंत महेश गिरि जी महाराज ने अपना जीवन समर्पित कर दिया है। महंत महेश गिरि ने सनातन धर्म की सुरक्षा, संरक्षण एवं विश्व कल्याण के लिए पिछले दो साल से अपना दाहिना हाथ उठा रखा है।
माघ मेले में संगम की रेती पर सनातन धर्म की रक्षा के लिए महंत महेश गिरि जी महाराज ने अपना जीवन समर्पित कर दिया है। महंत महेश गिरि ने सनातन धर्म की सुरक्षा, संरक्षण एवं विश्व कल्याण के लिए पिछले दो साल से अपना दाहिना हाथ उठा रखा है। उन्होंने संकल्प लिया है कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए वह आजीवन अपना दाहिना हाथ उठाकर तपस्या करेंगे।
विज्ञापन
राजस्थान के नागौर जिले में स्थित आश्रम से आए महंत महेश गिरि जी महाराज ने माघ मेले में सेक्टर पांच के अन्नपूर्णा मार्ग पर कुटिया में अपने शिष्यों के साथ धुनी रमा रखी है। वह मेला क्षेत्र में वसंत पंचमी तक रहेंगे।
जूना अखाड़े से जुड़े महंत महेश गिरि जी महाराज ने तकरीबन दो साल पहले यह अनूठी और कठिन साधना शुरू की थी। माघ मेला शुरू होने के दो दिन बाद महंत महेश गिरि अपने शिष्यों के साथ संगम की रेती पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि दो साल पहले उन्हें आभास हुआ कि सनातन धर्म की रक्षा, संरक्षण एवं संवर्धन के लिए बड़ी साधना करनी होगी।
विज्ञापन
इसके बाद महंत महेश गिरि नागौर में स्थित देवी मंदिर पहुंचे और वहीं पर कठोर पूजन के बाद संकल्प लिया कि अब वह आजीवन एक हाथ ऊपर उठाकर अनूठी तपस्या करेंगे। तकरीबन दो साल से दाहिना हाथ ऊपर रखने के कारण हड्डियां पत्थर जैसी हो गई हैं। साथ ही हाथ की उंगलियों के नाखून भी काफी लंबे हो गए हैं।