जिला अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी चाचा को बरी कर दिया। साथ ही झूठी एफआईआर दर्ज कराने वाले पीड़िता के चचेरे भाई के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। यह फैसला पॉक्सो एक्ट की विशेष न्यायाधीश कुमारी अनीता की अदालत ने सुनाया। मामला वर्ष 2016 का है।
प्रयागराज के सोरांव थाना क्षेत्र के पिडोरिया गांव में रहने वाली सात साल की पीड़िता के ताऊ के बेटे ने परिवार के ही चाचा के खिलाफ दुष्कर्म और जान से मारने की धमकी देने की एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि चाचा ने उसकी चेचरी बहन को भूसे वाले कमरे में खींच लिया और दुष्कर्म किया। पीड़िता के शोर मचाने पर वह मौके से धमकी देते हुए भाग निकला। पुलिस ने मामले की विवेचना के बाद पॉक्सो अधिनियम के साथ ही दुष्कर्म का आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। आठ साल चले ट्रायल के दौरान पीड़िता और उसकी मां ने घटना से इन्कार कर दिया।
मां ने बताया कि उसके जेठ और आरोपी के बीच रास्ते को लेकर विवाद था। इस कारण जेठ के बेटे ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। कोर्ट ने आरोपी चाचा को आरोप से दोषमुक्त कर दिया। साथ ही झूठी एफआईआर दर्ज कराने के वाले पीड़िता के चचेरे भाई के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दे दिया।