उमेश पाल हत्याकांड में नया खुलासा हुआ है। पुलिस एनकाउंटर में ढेर असद के फोन से चौंकाने वाले राज खुले हैं। असद ने उमेश पाल की हत्या से पहले ‘मॉरीशस अंकल’ से मैसेज पर बात की थी। अब पुलिस ने ‘मॉरीशस अंकल’ के माफिया परिवार से रिश्ते की पड़ताल शुरू कर दी है।
उमेश पाल हत्याकांड के मुख्य शूटर असद के ‘मॉरीशस अंकल’ की पड़ताल शुरू हो गई है। पुलिस अफसरों ने गोपनीय तरीके से इसकी जांच शुरू करा दी है। पता लगाया जा रहा है कि माफिया के परिवार से इस ‘मॉरीशस अंकल’ के क्या रिश्ते हैं।
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मॉरीशस अंकल के बारे में पुलिस को तब पता चला जब असद के मोबाइल और उसकी सीडीआर की जांच की गई। पता चला कि उमेश पाल की हत्या से कुछ दिनों पहले ही असद ने अपने मोबाइल से इस शख्स से चैट की थी।
इसमें असद के पूछने पर उसने जवाब दिया कि वह मॉरीशस में है। इस शख्स के बारे में फिलहाल, इतना ही पता चल पाया है कि कई बड़े लोगों के साथ उसका उठना बैठना है। पुलिस अफसरों ने इस बात की गोपनीय तरीके से जांच शुरू करा दी है कि माफिया के परिवार से उसका क्या रिश्ता है।
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अतीक व उसके दो बेटों उमर-अली के जेल जाने के बाद माफिया के गैंग की कमान संभालने वाले असद उसके संपर्क में क्यों था। मदद मांगने के लिए जिन चुनिंदा लोगों को उसने फोन किया, उसमें उसका भी नाम क्यों शमिल था।
फिलहाल, इस बारे में अफसर कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। हालांकि, पुख्ता सूत्रों का कहना है कि गोपनीय तरीके से जांच के लिए टीमें लगाई गई हैं।
मददगारों पर जल्द कसा जाएगा शिकंजा
उमेश पाल हत्याकांड के आरोपियों को जेल भेजने के बाद अब पुलिस माफिया के परिवार के मददगारों पर जल्द ही शिकंजा कसने वाली है। सूत्रों के मुताबिक कुछ ऐसे नाम सामने आए हैं जो अतीक-अशरफ के जेल जाने के बाद इस परिवार की चोरी-छिपे लगातार मदद कर रहे थे।
इनमें से कुछ अतीक के गैंग के सदस्य हैं तो कुछ सफेदपोश भी शामिल हैं। इन सफेदपोश में ज्यादातर नाम रियल इस्टेट, प्रॉपर्टी डीलिंग का कारोबार करने वाले हैं। जेल के भीतर रहकर भी किसी भी विवादित जमीन पर कब्जा दिलाने में अतीक इनकी मदद करता था। बदले में यह अतीक के परिवार को रुपये पहुंचाते थे।
अतीक के चचेरे भाई ने हत्या के मुकदमे में पैरवी न करने को धमकाया
उधर, प्रयागराज के सिविल लाइंस में माफिया अतीक अहमद के चचेर भाई हमजा उस्मान पर मुकदमा दर्ज हुआ है। आरोप है कि चाचा की हत्या के मुकदमे में पैरवी करने पर उसने इरशाद अली खान को बम से मारने की धमकी दी। कहा कि पैरवी न छोड़ने पर वही हश्र करूंगा, जो चाचा का किया था। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
इरशाद अली खान ताशकंद मार्ग सिविल लाइंस का निवासी है। उसने बताया कि उसके सगे चाचा अहमद अली उर्फ नन्हे की पांच अगस्त 2006 को गोलियां व बम से हमलाकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में उसके भाई अंसार अली खान ने हमजा पुत्र मो.उस्मान निवासी मेहंदौरी काॅलोनी थाना शिवकुटी पर सिविल लाइंस थाने में मुकदमा लिखाया था।
इस मामले में हमजा को न्यायालय ने दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वर्तमान में वह जमानत पर बाहर है। बड़े भाई की मौत के बाद मुकदमे की पैरवी वह कर रहा है। आरोप है कि जमानत पर रिहा होने के बाद से हमजा विभिन्न माध्यम से बम से मारने की धमकी दे रहा है। लगभग डेढ़ महीने पहले जब वह ज्वाला देवी स्कूल के पास अपने गैरेज पर था, तभी अचानक से आकर गालियां दीं।
साथ ही धमकाया कि चाचा की हत्या के मुकदमे की पैरवी करना छोड़ दो नहीं तो तुम्हें भी मार दूंगा। वादी ने पुलिस को बताया कि वह घर का इकलौता जिम्मेदार सदस्य है,जो धमकी से पूरी तरह से सहम गया। अब उसे लगातार धमकी मिल रही है। इस बात का भी डर है कि कोई घटना न हो जाए। सिविल लाइंस पुलिस ने बताया कि तहरीर के आधार पर गालीगलौज व धमकी देने के आरोप में केस दर्ज किया गया है।