अपने फोन से अतीक की नियाज से बात भी कराई गई थी। नियाज ने अगले दिन से ही उमेश की रेकी शुरू कर दी थी। उमेश जहां भी जाता, नियाज पीछे पीछे चल पड़ता। उमेश की गतिविधियों की पूरी जानकारी नियाज असद को देने लगा। उमेश के पड़ोसी मो. सजर ने बताया कि उसने भी 13 फरवरी से ही उमेश के लिए रेकी शुरू कर दी थी। उमेश कितने बजे घर से निकला।
कौन कौन उसके साथ है। सब बातें वह इंटरनेट फोन से असद तथा अन्य गुर्गों को बताता रहा। सजर को असद ने आईफोन दिया था। उस पर पहले से ही नंबर फीड थे। उन्हीं नंबरों पर सजर जानकारी साझा करता था। सजर ने बताया कि उसे आईफोन दिया गया था लेकिन फोन इंटरनेट से फोन करने के अलावा वह और कोई फंक्शन नहीं जानता था। अरशद ने भी बताया कि उसकी जिम्मेदारी कचहरी के आस पास की गतिविधियों की जानकारी देनी थी।
इस दौरान जितनी बार उमेश कचहरी गया। वहां की पूरी जानकारी असद को देता रहा। अतीक के नौकरों कैश अहमद और राकेश उर्फ लाला ने बताया कि हत्याकांड के बाद सभी शूटर चकिया वापस आए थे। शाइस्ता ने सभी को पैसे दिए। शूटरों के जाने के बाद शाइस्ता ने अपने अन्य नौकरों के माध्यम से शूटरों के घर वालों को भी पैसे भिजवाए थे। तीन बजे तक उनसे पूछताछ की गई। इसके बाद पांचों आरोपियों को वापस नैनी जेल भेज दिया गया।