फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Atiq Ahmed: अपहरण केस में दोष साबित हुआ तो अतीक आजीवन जेल में रहेगा, 102 केस दर्ज, पहली बार होगी सजा!

Mon, 27 Mar 2023 10:25 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

राजू पाल हत्याकांड के गवाह उमेश पाल का 2006 में अपहरण कर लिया गया था। 2007 में बसपा सरकार आने पर उमेश पाल की ओर से इस मामले में अधिक समेत 11 लोगों के खिलाफ धूमनगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इस मामले की सुनवाई 23 मार्च को पूरी हो चुकी है और 28 मार्च को फैसला सुनाया जाना है। 
विज्ञापन
अतीक अहमद को साबरमती जेल से लेकर रवाना हुई प्रयागराज पुलिस - फोटो : एएनआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उमेश पाल अपहरण केस में सुनवाई पूरी हो चुकी है और 28 मार्च को फैसला सुनाया जाना है। फैसला क्या होगा इस बारे में तो अभी कुछ नहीं कहा जा सकता, लेकिन जानकारों का कहना है कि अगर दोष साबित हुआ तो अतीक समेत अन्य आरोपियों को आजीवन कारावास की भी सजा हो सकती है।
विज्ञापन


हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण कुमार मिश्रा का कहना है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 364ए फिरौती के लिए अपहरण को परिभाषित करती है। इसके अनुसार, किसी व्यक्ति का व्यपहरण या अपहरण करने के बाद उसे अवैध तरीके से हिरासत में रखकर मृत्यु या क्षति कारित करने की धमकी देना या अपने आचरण से ऐसी यथोचित आशंका पैदा करना कि उस व्यक्ति की मृत्यु हो सकती है या उसको क्षति की जा सकती है। 

और ऐसा करके किसी अन्य व्यक्ति को किसी कार्य को करने या करने से रोकने के लिए या फिरौती देने लिए विवश किया जाए, तो ऐसे व्यक्ति को मृत्युदंड आजीवन कारावास से दंडित किया जा सकता है। वह आर्थिक दंड के लिए भी उत्तरदायी होगा।
विज्ञापन


अपहरण के अपराध में आजीवन कारावास या मृत्युदंड भी संभावित
अधिवक्ता अमित कुमार सिंह बताते हैं कि अगर यह हो जाता है कि अपराध षड्यंत्र के तहत कारित किया गया तो अन्य आरोपी भी उसी सजा के हकदार होंगे, जो मुख्य आरोपी के लिए तय की गई है। फिरौती के लिए अपहरण के अपराध में आजीवन कारावास या मृत्युदंड भी संभावित है ऐसे में अन्य आरोपी भी इसी सजा के हकदार हो सकते हैं। 

यह है पूरा मामला

राजू पाल हत्याकांड के गवाह उमेश पाल का 2006 में अपहरण कर लिया गया था। 2007 में बसपा सरकार आने पर उमेश पाल की ओर से इस मामले में अधिक समेत 11 लोगों के खिलाफ धूमनगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इस मामले की सुनवाई 23 मार्च को पूरी हो चुकी है और 28 मार्च को फैसला सुनाया जाना है। 


विज्ञापन

11 में से एक की मौत हो चुकी है जबकि 10 आरोपियों पर आरोप तय हुए हैं। जिन पर आरोप तय हुए हैं उनमें अतीक अहमद के अलावा उसका भाई खालिद अजीम उर्फ अशरफ और गुर्गा आबिद प्रधान, आशिक उर्फ मल्ली, जावेद इसरार, एजाज अख्तर, दिनेश पासी, खान सौलत, हनीफ और एक अन्य शामिल हैं।

यह भी पढ़ें: Prayagraj : ऑपरेशन अतीक पर सबसे बड़ा सवाल- क्या विकास दुबे जैसा होगा माफिया डॉन का हाल
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें