कोर्ट के बाहर सुबह दस बजे से भीड़ होनी शुरू हो गई थी। वकीलों की तमाम गाड़ियां सड़क के अगल बगल थीं। बाहर से आए मीडिया चैनलों की बड़ी संख्या में वैन अगल बगल खड़ी हो गईं। सड़क के बीच वज्र वाहन जाने का रास्ता ही नहीं बचा। वहां तैनात पुलिस वालों ने सूचना दी तो आनन फानन जेल से कचहरी तक का रूट बदल दिया गया।
नैनी जेल से अतीक, अशरफ और फरहान को पुलिस नए पुल, सोहबतियाबाग, बालसन होते हुए आनंद हास्पिटल चौराहे पहुंचे। वहां से बेली अस्पताल होते हुए पीछे के रास्ते से एमपी एमएलए कोर्ट के गेट नंबर एक पर पहुंची। वहां भारी संख्या में आरएएफ की तैनाती की गई थी। पुलिस की गाड़ियां और तीनों वज्र वाहन कुछ कुछ मिनट के अंतराल पर कोर्ट परिसर में चली गईं। इसके बाद गेट फिर बंद कर दिया गया। जगराम चौराहा, जहां से गाड़ियां कोर्ट के लिए मुड़ी थीं, उसे भी बेरीकेडिंग लगाकर बंद कर दिया गया।
कॉरिडोर बनाकर गाड़ियों को परिसर के अंदर किया गया
गेट पर सुबह दस बजे से ही भारी भीड़ थी। गेट पर पुलिस के साथ ही आरएएफ को तैनात किया गया था। जब नैनी जेल से गाड़ियां आनी शुरू हुईं तो आरएएफ और पुलिस वालों ने सड़क के दोनों ओर रस्सी लगाकर एक कॉरिडोर बना दिया। यहीं से गाड़ियों को कोर्ट परिसर में भेजा गया।
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