एक महीने में जमा करना होगा 25 लाख रुपये
हाईकोर्ट ने बिल्डर पर 25 लाख रुपये का हर्जाना लगाया है। यह रकम एक महीने के भीतर सोसाइटी के खाते में जमा करनी होगी। इसके अलावा प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को प्रत्येक याचिकाकर्ता को दो महीने के भीतर 50 हजार रुपये देने का निर्देश दिया गया है।
85 लोगों को बेचे गए साझा क्षेत्र
अदालत के अनुसार, बिल्डर ने सोसाइटी के साझा क्षेत्रों को 85 लोगों को बेच दिया। इन क्षेत्रों की पहचान करने के लिए प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की जाएगी। जांच में जहां अवैध निर्माण पाया जाएगा, उसे ध्वस्त कर साझा क्षेत्र सोसाइटी को सौंपा जाएगा। कोर्ट ने बिल्डर को साझा क्षेत्र के खरीदारों से ली गई रकम लौटाने का भी निर्देश दिया है। इसके साथ निर्माण लागत और 10 प्रतिशत ब्याज का भुगतान करना होगा। पूरी प्रक्रिया छह महीने में पूरी करने को कहा गया है।
दो सप्ताह में एफआईआर दर्ज करने का आदेश
हाईकोर्ट ने साझा क्षेत्रों की बिक्री और धोखाधड़ी के मामले में बिल्डर के खिलाफ दो सप्ताह के भीतर प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है। मामले की जांच अतिरिक्त पुलिस आयुक्त से नीचे के स्तर के अधिकारी को नहीं सौंपी जाएगी।
जीडीए उपाध्यक्ष और निरीक्षक पर भी कार्रवाई
अदालत ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष के खिलाफ एक महीने के भीतर विभागीय जांच शुरू करने का निर्देश दिया है। मामले में लापरवाही बरतने वाले निरीक्षक सुरेंद्र सिंह को निलंबित कर उनके खिलाफ भी विभागीय जांच कराने का आदेश दिया गया है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि टावरों के ध्वस्तीकरण पर होने वाला खर्च बिल्डर से भू-राजस्व के बकाये की तरह वसूला जा सकता है। इस आदेश के जरिए अदालत ने अवैध निर्माण, साझा क्षेत्रों की बिक्री और संबंधित अधिकारियों की कथित लापरवाही पर जवाबदेही तय करने का निर्देश दिया है।