फ्यूल सेल को ट्रिपलआईटी के अप्लाइड साइंस विभाग के फिजिक्स अनुभाग के वैज्ञानिक डॉ. उपेंद्र कुमार के नेतृत्व में शोध छात्र राज कुमार, विपिन कुमार और वेदिका यादव ने विकसित किया है। डॉ. कुमार का नाम स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय की हालिया वैश्विक रैंकिंग में शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों में शामिल है।
वर्तमान में यह प्रोटोटाइप दस वोल्ट बिजली उत्पन्न कर रहा है। वैज्ञानिकों का दावा है कि बड़े स्तर पर विकसित होने पर इस तकनीक की एक यूनिट एक गांव की बिजली और शुद्ध जल की जरूरत पूरी कर सकेगी। यह फ्यूल सेल चार हजार आठ सौ किलोवाट प्रति मिनट बिजली उत्पन्न करेगा। इस प्रक्रिया में एक किलो पानी से दस किलोवाट बिजली तैयार की जा सकेगी।
वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में नई उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के लिए उपयोगी होगी, जहां गर्मी में बिजली कटौती और दूषित जल की समस्या रहती है। शोधकर्ताओं के अनुसार भविष्य में इसे जल शोधन संयंत्रों और छोटे बिजली उत्पादन केंद्रों के रूप में विकसित किया जा सकता है। इससे जल प्रदूषण में कमी आएगी और ऊर्जा उत्पादन के लिए नए संसाधन उपलब्ध होंगे। विशेषज्ञों का दावा है कि यह खोज स्वच्छ भारत और स्वच्छ ऊर्जा अभियानों को मजबूती देने वाली है।