कैंट पुलिस ने हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति के पारित आदेश की छायाप्रति सोशल मीडिया पर लगाकर अभद्र टिप्पणी करने वाले दो सगे भाइयों को गिरफ्तार किया है। कैंट पुलिस ने बताया कि 24 फरवरी को हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति के पारित आदेश की छायाप्रति ‘अश्वनी अंबेडकर मूल निवासी’ नाम से बनी फेसबुक प्रोफाइल पर अटैच कर न्यायमूर्ति के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की गई थी। मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने जालौन के रूरा अडडू पिया निरंजनपुर, उरई निवासी दो सगे भाइयों दीपक कुमार और देविंदर पुत्र संतोष कुमार को गिरफ्तार किया है।
जानबूझकर सूचना देने में देरी पर ही लगा सकते हैं जुर्माना
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम-2005 की धारा-20 के तहत जुर्माना और दंडात्मक कार्रवाई तभी की जा सकती है, जब संबंधित अधिकारी ने जानबूझकर या बिना ठोस कारण के सूचना देने में देरी की हो। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति अजित कुमार, न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने याची आईपीएस अधिकारी शैलेश यादव के खिलाफ जुर्माना व अनुशासनात्मक की कार्रवाई रद्द कर दी।शैलेश गाजियाबाद में क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय में क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी के रूप में तैनात थे। उस दौरान उनके पास सूचना अधिकारी का पदभार भी था।
एक व्यक्ति ने उनसे पासपोर्ट के संबंध में जन सूचना अधिकार के तहत कुछ जानकारी मांगी थी। निर्धारित समय में सूचना नहीं मिली तो मामला केंद्रीय सूचना आयोग तक पहुंच गया। इस पर तत्कालीन सूचना आयुक्त ने वर्ष 2006-2007 में याची पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया और अनुशासनात्मक कार्रवाई का भी आदेश दिया। इस फैसले को याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
अधिवक्ता ने दलील दी कि याची पर बिना किसी ठोस आधार के पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर अधिकतम 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। विभाग ने आंतरिक जांच रिपोर्ट में यह माना है कि पासपोर्ट कार्यालय में कर्मचारियों की भारी कमी और कार्यभार की अधिकता थी। इससे सूचना सही समय पर नहीं दी जा सकी। विभाग की जांच रिपोर्ट का आयोग ने संज्ञान नहीं लिया।