जिला उपभोक्ता फोरम ने समय से स्पीड पोस्ट की डिलिवरी न करने को सेवा में कमी माना है और पोस्ट आफिस पर दस हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। फोरम ने एक माह के अंदर स्पीड पोस्ट भेजने में लगा शुल्क, हर्जाने की धनराशि और तीन हजार रुपये मुकदमा खर्च वादी को देने का आदेश दिया है। यह आदेश जिला फोरम के अध्यक्ष सुख लाल और सदस्य सुमन पाण्डेय ने सुनवाई के बाद दिया है।
परिवादी विपिन कुमार शुक्ल निवासी बेंदो करछना ने आईटीआई नैनी पोस्ट आफिस से 29 जनवरी 2014 को फार्मासिस्ट पद के लिए आवेदन फार्म स्पीड पोस्ट के जरिए महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान जवाहर भवन, लखनऊ के लिए भेजा था। वादी ने 40 रुपये शुल्क का भुगतान किया था। जब वादी का प्रवेश पत्र नहीं आया तो उसने नैनी पोस्ट आफिस से जानकारी मांगी। उसे बताया गया कि उसका फार्म आरएमएस को भेजा गया था। डाक विभाग ने फार्म को लखनऊ न भेजकर माध्यमिक शिक्षा चयन आयोग इलाहाबाद भेज दिया था। फार्म वापस आने पर आरएमएस ने लखनऊ भेजा, जो कि ढाई माह बाद 11 अप्रैल 2014 को पहुंचा। तब तक आवेदन की समय सीमा समाप्त हो गई थी। वादी ने नैनी पोस्ट मास्टर और मुख्य पोस्ट मास्टर सर्किल लखनऊ के खिलाफ फोरम में शिकायत परिवाद दाखिल किया था।
फोरम ने कहा है कि देरी से स्पीड पोस्ट की डिलिवरी करना सेवा में कमी है। पोस्ट ऑफिस देरी से डिलवरी करने का समुचित कारण स्पष्ट नहीं कर सका है। डाक न पहुंचने से परिवादी नौकरी के लिए साक्षात्कार में शामिल होने से वंचित हो गया। फोरम ने पोस्ट ऑफिस को आदेश दिया है कि एक माह के अंदर 10 हजार रुपये क्षतिपूर्ति और तीन हजार रुपये मुकदमा खर्च वादी को अदा करे और स्पीड पोस्ट का शुल्क भी वापस दे।