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Prayagraj : रेलवे के खोदे गए गड्ढे में गिरकर 25 भेड़ों की मौत, भेड़ पालक परिवार को लाखों का नुकसान

Fri, 07 Jun 2024 01:46 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

घूरपुर क्षेत्र के पिपिरसा और भड़रा गांव के बीच रेलवे के द्वारा खोदे गए गड्ढे में गिरकर दो दर्जन से अधिक भेड़ों की मौत हो गई। भेड़ पालक चराने के बाद भेड़ों को घर ला रहा था। आगे चल रही एक भेड़ गड्ढे में गिर गई, जब तक वह बाहर निकलती तब तक पीछे चल रही बड़ी संख्या में भेड़ें अपने स्वभाव के चलते गड्ढे में कूदती चली गईं। 
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गड्ढे में गिरने से भेड़ों की मौत। - फोटो : अमर उजाला।
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घूरपुर क्षेत्र के पिपिरसा और भड़रा गांव के बीच रेलवे के द्वारा खोदे गए चार फीट के गड्ढे में गिरकर 25 भेड़ों की मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ जब भेड़ पालक चराने के बाद भेड़ों को लेकर घर लौट रहा था। आगे चल रही एक भेड़ गड्ढे में गिर गई। वह बाहर निकलने का प्रयास कर ही रही थी कि उसके पीछे चल रहीं करीब 25 भेड़ें अपने स्वभाव के चलते उसी गड्ढे में कूदती चली गईं, जिससे एक दूसरे से दबकर 25 भेड़ों की मौत हो गई। इससे भेड़ पालक परिवार में मातम छा गया  गया। उसकी आय का मुख्य साधन यही है। 

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पिपिरसा गांव निवासी छोटेलाल पाल भेड़ पालक हैं। उन्होंने घर पर ही सवा सौ भेड़ें पाल रखी हैं, जिनकी देखरेख पूरा परिवार मिलजुलकर करता है। बुधवार को छोटेलाल अपने बेटे इंद्रपाल के साथ भेड़ों को चराने ले गए थे। दिन भर चराने के बाद दोनों भेड़ों को वापस घर ले आ रहे थे। पिपिरसा और भड़रा गांव के बीच से निकली रेलवे लाइन की पुलिया से होकर भेड़ें बाहर निकल रही थीं।पुलिया में सिल्ट जमा होने के कारण उसकी खुदाई की जा रही थी, जिसके चलते लगभग चार फीट गहरा गड्ढा बन गया था।

आगे चल रही कुछ भेड़ें इसी गड्ढे में गिर गईं। गड्ढे में गिरीं भेड़ें बाहर निकलने का प्रयास करने लगीं लेकिन गड्ढा गहरा होने और मिट्टी का ढेर होने चलते वह फिसल जा रही थीं। तब तक पीछे चल रहा भेड़ों का झुंड भी इस गड्ढे में कूदता चला गया। छोटेलाल और इंद्रपाल ने भेड़ों को बचाने की बहुत कोशिश की, लेकिन असफल रहे। दोनों के देखते ही देखते दर्जनों भेड़ें एक दूसरे के ऊपर गड्ढे में गिर पड़ीं।

बदहवासी की हालत में पिता-पुत्र ने एक के ऊपर एक लदी भेड़ों को गड्ढे से निकलना शुरू किया, लेकिन भेड़ों की संख्या अधिक होने के चलते बेदम हो गए। दोनों की चीख-पुकार सुनकर पहुंचे गांव के लोगों ने जैसे तैसे कर भेड़ों को गड्ढे से बाहर निकाला, लेकिन तब तक चोट और दम घुटने से पच्चीस भेड़ों की मौत हो गई थी। भेड़ो की मौत से भेड़ पालक परिवार चिंतित है।
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भेड़ पालन ही था जीवकोपार्जन का सहारा 

छोटेलाल कीआजीविका का स्रोत भेड़ पालन ही है। दो दर्जन से अधिक भेड़ों की मौत से परिवार को बड़ी आर्थिक क्षति हुई है। छोटेलाल ने उप जिलाधिकारी करछना और घूरपुर थाने में प्रार्थना पत्र देखकर आर्थिक सहायता दिलाए जाने की मांग की है।
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