आगे चल रही कुछ भेड़ें इसी गड्ढे में गिर गईं। गड्ढे में गिरीं भेड़ें बाहर निकलने का प्रयास करने लगीं लेकिन गड्ढा गहरा होने और मिट्टी का ढेर होने चलते वह फिसल जा रही थीं। तब तक पीछे चल रहा भेड़ों का झुंड भी इस गड्ढे में कूदता चला गया। छोटेलाल और इंद्रपाल ने भेड़ों को बचाने की बहुत कोशिश की, लेकिन असफल रहे। दोनों के देखते ही देखते दर्जनों भेड़ें एक दूसरे के ऊपर गड्ढे में गिर पड़ीं।
बदहवासी की हालत में पिता-पुत्र ने एक के ऊपर एक लदी भेड़ों को गड्ढे से निकलना शुरू किया, लेकिन भेड़ों की संख्या अधिक होने के चलते बेदम हो गए। दोनों की चीख-पुकार सुनकर पहुंचे गांव के लोगों ने जैसे तैसे कर भेड़ों को गड्ढे से बाहर निकाला, लेकिन तब तक चोट और दम घुटने से पच्चीस भेड़ों की मौत हो गई थी। भेड़ो की मौत से भेड़ पालक परिवार चिंतित है।
भेड़ पालन ही था जीवकोपार्जन का सहारा
छोटेलाल कीआजीविका का स्रोत भेड़ पालन ही है। दो दर्जन से अधिक भेड़ों की मौत से परिवार को बड़ी आर्थिक क्षति हुई है। छोटेलाल ने उप जिलाधिकारी करछना और घूरपुर थाने में प्रार्थना पत्र देखकर आर्थिक सहायता दिलाए जाने की मांग की है।