दरअसल, ऑपरेशन सिंदूर की वजह से सेना के तमाम जवानों की छुट्टियां निरस्त हुई हैं। इमरजेंसी ड्यूटी की वजह से जवानों को जो भी ट्रेन मिल रही है, वह उसमें सवार होकर अपने गंतव्य के लिए रवाना हो रहे हैं। इसी कड़ी में मंगलवार को ट्रेन संख्या 12506 नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस के एक एसी थ्री कोच में ड्यूटी के लिए जा रहे तकरीबन तीन दर्जन जवान सवार हो गए। इनमें से अधिकांश शौचालय के पास कोच सहायक वाली जगह पर ही बैठे थे। कुछ जगह न होने की वजह से खड़े भी थे।
इसी दौरान कोच में तैनात टीटीई ने जवानों को जनरल बोगी में जाने को बोला। यह देखकर ट्रेन में सफर कर रहे कुछ यात्रियों ने विरोध कर दिया। ट्रेन में सफर कर रहे वाराणसी के बिमल सक्सेना ने 1.35 मिनट का एक वीडियो बनाकर उसे रेलमंत्री और डीआरएम प्रयागराज को भेज दिया। बिमल ने बताया कि मंगलवार को ट्रेन जैसे ही कानपुर पहुंची तो वहां से कई जवान ट्रेन में चढ़े। इसके बाद फतेहपुर से भी एक दर्जन से अधिक जवान बोगी में चढ़ गए। इन सभी जवानों को गुवाहाटी तक जाना था।
ट्रेन में पहुंचे टीटीई ने जवानों को जनरल बोगी में जाने को कहा। जवानों के साथ ऐसा व्यवहार होता देख कुछ यात्रियों ने इसका विरोध कर दिया। कहा कि जब यात्रियों को जवानों से कोई दिक्कत नहीं है तो उन्हें क्यों जनरल बोगी में जाने को कहा जा रहा है।
उधर, बिमल द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से की गई शिकायत के बाद उनके पास एक फोन भी आया। पूछा गया कि वह टीटीई के खिलाफ कार्रवाई चाहते हैं तो बिमल ने कार्रवाई के लिए मना कर दिया। इस बीच प्रयागराज जंक्शन के पूर्व ही यात्रियों और कुछ रेलकर्मियों के सहयोग से जवानों को बैठने के लिए सीट दे दी गई। बताया जा रहा है कि इमरजेंसी ड्यूटी में जा रहे एक जवान की 18 मई को शादी है, लेकिन इमरजेंसी बुलावा आ जाने की वजह से वह अपनी शादी स्थगित कर ड्यूटी पर लौट गया।
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