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विरासत सेतु से कला संस्कृति को संजीवनी देने की कोशिश

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प्रयागराज। कोरोना संक्रमण में लॉकडाउन के बीच कला-संस्कृति को जिंदा रखने के लिए संस्कृति मंत्रालय ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है। प्रयोग के तौर पर विरासत-सेतु के तहत मंचीय प्रस्तुतियों को नया प्लेटफार्म देने की कोशिश की गई है। इसके तहत लोक कलाकार, नर्तक, गायक और रंगकर्मी घर बैठे अपने प्रस्तुतियां दे रहे हैं। घरों पर ही नृत्य, गायन की वीडियो बनवाई जा रही है। इसे एनसीजेडसीसी की वेबसाइट के जरिए दुनिया भर में लाइव दिखाया जा रहा है। इससे प्रस्तुति के साथ ही कलाकारों को रोजगार भी देने की शुरूआत की गई है। लॉकडाउन में एनसीजेडसीसी ने लोक कला, लोक गायन और अन्य लोक विधाओं की प्रस्तुतियों के लिए विरासत सेतु योजना के जरिए नया रास्ता खोल दिया है। इस योजना के तहत एनसीजेडसीसी के सभी सात राज्यों में विलुप्त प्राय लोक कलाओं, नृत्य, गायन व अभिनय से जुड़े कलाकारों को घर बैठे अपनी कला की प्रस्तुति का मौका दिया गया है। मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ की प्राचीन लोकगाथा गायन परंपरा भरथरी, पंडवानी व चनैनी के गायन के अलावा उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध लोकगाथा आल्हा के गायन के वीडियो कलाकारों से घर बैठे तैयार कराए गए हैं। इसी तरह छत्तीसगढ़ी बोली में सात बैरी सतखंडा, सोरा खंडा का गायन तथा लोरिक व चंदा की प्रेम कहानी पर आधारित चनैनी गायन के कलाकारों को भी विरासत सेतु के जरिए मंच दिया गया है। प्रेम व सख्य भाव को समर्पित रसिया गीत, लुप्त कला विधाओं में से एक नऊआ झाकड़ गायन, हरियाणा, उड़ीसा, झारखंड, राजस्थान, उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड अंचल के देशज लोकनृत्यों की प्रस्तुतियां भी अब कलाकारों ने इस सेतु के माध्यम से घरों से ही की है। जौनपुर क्षेत्र की लुप्त होती विधा नऊआ झाकड़ के अलावा हरियाणा के शादी-ब्याह एवं मांगलिक अवसरों पर होने वाला धूमर लोकनृत्य, उड़ीसा के कलाकारों की ओर से मंदिरों में किए जाने वाले मनोहारी लोकनृत्य गोटीपुआ, झारखंड के जनजातीय कलाकारों द्वारा रामायण-महाभारत की कथाओं पर आधारित छऊ एवं युद्धकला पर आधारित पैका लोकनृत्य, ब्रज के कलाकारों का मयूर नृत्य, राजस्थान के लोक कलाकारों के परंपरागत चरी एवं राजस्थानी घूमर लोकनृत्य एवं बुन्देलखण्ड के लोक कलाकारों द्वारा वेड़िने समुदाय का परम्परागत लोकनृत्य राई का वीडियो अब एनसीजेडसीसी अपनी वेबसाइट के जरिए दुनिया भर में दिखाएगा। कोट लॉकडाउन में कला-संस्कृति को जिंदा रखने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही हैं। इसी क्रम में विरासत सेतु के माध्यम से लोक कला शैलियों की प्रस्तुतियों को घर बैठे उत्सव का रूप दिया गया है। इससे कलाकारों को घर बैठे काम भी मिला है। इंद्रजीत ग्रोवर, निदेशक-एनसीजेडसीसी। 
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