इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को रामपुर स्थित मौलाना अली जौहर ट्रस्ट की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें जौहर यूनिवर्सिटी के भवनों को ध्वस्त करने संबंधी नोटिस को चुनौती दी गई थी। अदालत ने कहा कि मामले में मंडलायुक्त पहले ही अंतरिम राहत दे चुके हैं, इसलिए फिलहाल न्यायालय के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान ट्रस्ट की ओर से बताया गया कि मुरादाबाद मंडलायुक्त के समक्ष दायर अपील पर अंतरिम आदेश पारित करते हुए विश्वविद्यालय के भवनों के ध्वस्तीकरण पर रोक लगा दी गई है।
इस अंतरिम आदेश का संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में हस्तक्षेप करने का कोई औचित्य नहीं है। गौरतलब है कि मुरादाबाद मंडलायुक्त की अदालत ने सोमवार को समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान द्वारा स्थापित जौहर यूनिवर्सिटी को अंतरिम राहत देते हुए परिसर के 38 भवनों को ध्वस्त करने की कार्रवाई पर अंतिम सुनवाई तक रोक लगा दी थी।
इससे पहले 15 जुलाई को रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने विश्वविद्यालय प्रशासन को 40 में से 38 भवनों को 15 दिन के भीतर गिराने का निर्देश दिया था। प्राधिकरण का आरोप है कि इन भवनों का निर्माण स्वीकृत मानचित्र के बिना किया गया है। यह आदेश उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत जारी किया गया था, जिसकी समयसीमा 30 जुलाई को समाप्त हो रही है। ध्वस्तीकरण आदेश के विरोध में विश्वविद्यालय के छात्र धरने पर बैठे थे। हालांकि मंडलायुक्त के अंतरिम स्थगन आदेश के बाद छात्रों ने अपना आंदोलन फिलहाल स्थगित कर दिया है। मामले की अगली सुनवाई अब 3 अगस्त को मंडलायुक्त की अदालत में होगी।