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घरों पर लहराए थे तिरंगे, हर ओर जश्न

Tue, 15 Aug 2017 01:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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अरसे बाद जब अंग्रेजों की गुलामी से देश को आजादी मिली तो जैसे कोई नेमत मिल गई थी। चौदह अगस्त 1947 की रात से लेकर अगली भोर तक शहर के हर मोहल्ले में जश्न का माहौल था, तब साधन, संसाधन तो नहीं थे लेकिन लोगों के दिलों मे गजब का उत्साह था। हर किसी को लगा जैसे अरसे से संजोया सपना पूरा हो गया।
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इंडियन प्रेस के निदेशक कल्याण घोष कहते हैं, जार्जटाउन स्थित बंगले पर मेरे ताऊ और पटल बाबू के नाम से मशहूर इंडियन प्रेस के तत्कालीन प्रबंध निदेशक हरिकेशव घोष ने तकरीबन 25 फीट ऊंचा तिरंगा बनवाकर फहराया था। यह लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र था, लोग बाहर उल्लास में नाच-गा रहे थे। मेरी बहन ने भारत माता का एक बड़ा था चित्र बनाया था, जिसे बंगले के बाहर टांगा गया था। छत की रेलिंग पर मिट्टी के दीए जलाए गए थे।

हाईकोर्ट के रिटायर्ड सेक्शन अफसर और जरूरतमंद परिवारों की बेटियों की शादी तथा कमजोर वर्ग के बच्चों की शिक्षा के काम में जुटे गुजराती मोहल्ले के कपिल सहगल कहते हैं, तब मैं बहुत छोटा था लेकिन उस दिन की धुंधली यादें आज भी जेहन में हैं। लोग खुश थे और चौराहे पर मिठाइयां बांटी गई थीं। हर कोई उत्साहित था, हर कोई मगन। छोटे-छोटे बच्चे भी तिरंगा लेकर मोहल्ले में घूमे थे।
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दायराशाह अजमल के सज्जादानशीन सैयद मुहम्मद नासिर फाखरी कहते हैं, आजादी मिलने की खुशी सभी के चेहरे पर थी। हर कोई शाम से ही उत्साहित था। तब इक्का दुक्का घरों में रेडियो था सो लोग पंडित नेहरू का भाषण सुनने के लिए बेताब थे। लोगों ने राष्ट्र के नाम उनका संदेश सुना था।

बाघंबरी गद्दी मार्ग स्थित वरिष्ठ लेखक-पत्रकार नरेश मिश्र ने कहा, उस दिन की खुशी को सिर्फ महसूस किया जा सकता है, बयान नहीं। लीडर प्रेस के जनरल मैनेजर सीताराम गुंठे के वेणीमाधव मंदिर वाले मकान पर बड़ा जश्न हुआ था। दारागंज सहित शहर के तमाम मोहल्लों मे रतजगा था। खपरैल के घरों में रह रहे लोगों ने छोटे- छोटे झंडे लगाए, खूब गाना-बजाना हुआ, मोहल्ले में खूब मिठाइयां बांटी गईं। आजादी के उत्सव मेें शामिल होने के लिए गाड़ियों में नि:शुल्क यात्रा सुविधा दी गई थी। जगह-जगह मेले जैसा माहौल था, कहीं दंगल-कुश्ती तो कहीं जादू जैसे कार्यक्रम हुए। हालांकि आज आजादी के सत्तर बरस बाद वे बदलाव नहीं दिखे जो दिखने चाहिए थे।
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