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UP : चार्जशीट की देरी पर मुकदमे की कार्यवाही रद्द, हाईकोर्ट ने कहा- कानून की जगह नहीं ले सकता सामान्य प्रचलन

Fri, 23 Jan 2026 06:07 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चोरी के मामले में दो आरोपियों के खिलाफ पांच साल बाद दायर चार्जसीट पर नाराजगी जताते हुए मुकदमे की पूरी कार्यवाही रद्द कर दी।
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अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चोरी के मामले में दो आरोपियों के खिलाफ पांच साल बाद दायर चार्जसीट पर नाराजगी जताते हुए मुकदमे की पूरी कार्यवाही रद्द कर दी। न्यायिक मजिस्ट्रेट का यह कहना कि अदालतों में सामान्यत: ऐसा ही होता है पर कोर्ट ने कहा कि कानून की जगह सामान्य प्रचलन नहीं ले सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरी की एकलपीठ ने दिया है।

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फिरोजाबाद के नॉर्थ थाने में अप्रैल 2019 में मोटरसाइकिल चोरी की एफआईआर दर्ज की गई थी। इसमें पांच आरोपियों के खिलाफ तो समय पर चार्जशीट दाखिल हो गई थी, लेकिन जांच के दौरान सामने आए दो अन्य आरोपियों सूरज ठाकुर और अवनीश कुमार के खिलाफ चार्जशीट घटना के करीब पांच साल की देरी के बाद 24 नवंबर 2024 को कोर्ट में पेश किया गया। तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आरोप पत्र का तुरंत संज्ञान ले लिया। इसके खिलाफ दोनों आरोपियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मुकदमे की कार्यवाही रद्द करने की मांग की।

हाईकोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि आईपीसी की जिन धाराओं में अधिकतम सजा 3 साल है, उनमें दंड प्रक्रिया संहिता के तहत 3 वर्ष के भीतर ही संज्ञान लिया जाना अनिवार्य है। समय सीमा समाप्त होने के बाद चार्जशीट पर लिया गया संज्ञान पूरी तरह अवैध है। जब मजिस्ट्रेट ने सफाई दी कि आमतौर पर विस्तृत जांच के बिना ही संज्ञान ले लिया जाता है, तो हाईकोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि कोई भी सामान्य प्रचलन स्थापित कानून का स्थान नहीं ले सकता।
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हाईकोर्ट ने माना कि पुलिस और अदालत की यह सुस्ती नागरिकों के अनुच्छेद 21 (प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता) के तहत मिलने वाले ''त्वरित न्याय के अधिकार'' का सीधा उल्लंघन है। इसके साथ ही कोर्ट ने सूरज और अवनीश के खिलाफ संज्ञान आदेश और समस्त कार्यवाही रद्द कर दी। इस मामले में अन्य आरोपियों पर केस जारी रहेगा। वहीं, कोर्ट ने न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान को निर्देश दिया गया कि वह न्यायिक अधिकारियों को संज्ञान लेने के कानूनी नियमों का उचित प्रशिक्षण दें।

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