trend changed now iftar party to corona warriors
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लॉकडाउन में जहां इस बार बड़ी-बड़ी इफ्तार पार्टियां नहीं हो पा रही हैं। मस्जिदों, रिश्तेदारों और दोस्तों के यहां लजीज पकवान के रूप में इफ्तारी भेजना संभव नहीं हो पा रहा है। ऐसे में धर्मगुरुओं की सलाह पर रमजान में इफ्तार का तरीका बदला है। अब रिश्तेदारों, परिचितों की बजाए कोरोना योद्धाओं को पैक इफ्तार भेजी जा रही है।
आमतौर पर रोजा इफ्तार में बड़ी -बड़ी दावतें होती रही हैं। चाहे वह राजनीतिज्ञ हों या समाजसेवी या फिर उद्योगपति, सामूहिकता पर रोक की वजह से इस बार कौमी एकता के लिए इफ्तार पार्टियां नहीं हो पा रही हैं। पहले जहां इफ्तार की दावतों के लिए होटलों, अतिथिगृहों में जगह मिलनी मुश्किल होती थी, वहीं इस बार लॉकडाउन में दोस्तों, परिचितों को भी इफ्तार भेजना मुश्किल हो गया है। ऐसे में इस्लामिक धर्मगुरुओं ने इफ्तार भेजने केतरीके में बदलाव करने के लिए कहा है। सुल्तान-ए-मिल्लत हजरत सुल्तान अजीज का कहना है के रिश्तेदारों, दोस्तों के घर इफ्तार पहुंचाने का सिलसिला इस बार नहीं बन पा रहा है। ऐसे में इस परंपरा को कायम रखने के लिए रोजेदारों व कौम के लोगों को कोरोना योद्धाओं को पैक इफ्तार के व्यंजन भेजने चाहिए।
अपने क्षेत्र के सफाई कर्मी, स्वास्थ्य कर्मी, बिजली कर्मी और सबसे बेहतर पुलिसकर्मी जो हमारी सुरक्षा के लिए दिन इसी तरह शीशे वाली मस्जिद के मौलाना कादिर अहमद ने भी कोरोना योद्धाओं को इफ्तार भेजने की सलाह दी है। धर्म गुरुओं के संदेशों पर लोगों ने अमल करना भी शुरू कर दिया है। अब लॉकडाउन में ड्यूटी पर तैनात कोरोना योद्धाओं को और सफाई कर्मियों को इफ्तार भेंट की जा रही है। उनके लिए लजीज व्यंजनों के साथ ठंडे पानी के भी इंतजाम किए जा रहे हैं। ताकि ईद की खुशी हासिलल हो सके।