इलाहाबाद। किताबें आरबीआई के खजाने से ज्यादा कीमती होती हैं। टीवी और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स से जानकारी तो मिल सकती है, लेकिन ज्ञान किताबों से ही मिलता है। किताबें सुख-दुख के साथ तो होती ही हैं व्यक्तित्व विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यह बातें सोमवार को प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने कहीं। वह भारती भवन पुस्तकालय के 125 वें स्थापना दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि मौजूद थे। उन्होंने कहा कि भारती भवन पुस्तकालय में दुर्लभ किताबें और पांडुलिपियां मौजूद हैं, जो शायद ही कहीं और हों। यही वजह है देश के कोने-कोने से लोग यहां के संग्रह में शामिल किताबों को पढ़ने आते हैं।
उन्होंने कहा कि भारती भवन पुस्तकालय एक पावर हाउस की तरह है, जहां से ज्ञान का संचार होता है। यह कोई साधारण पुस्तकालय नहीं है बल्कि आजादी आंदोलन के दौरान यह स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का गढ़ भी रहा है, जो इस पुस्तकालय की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। दुर्लभ किताबों, पांडुलिपियों और दस्तावेजों की माइक्रोफिलिंग करने की दिशा में वह पुरा सहयोग करेंगे। आश्वासन दिया कि वो केंद्र और राज्य के बीच सामंजस्य स्थापित करने का काम करेंगे। ई-लाइब्रेरी शुरू करने का भी सुझाव दिया। पुस्तकालय के विकास के लिए दान दाताओं से आगे आने की अपील की।
इससे पूर्व महामना मदन मोहन मालवीय, पुस्तकालय के संस्थापक ब्रज मोहन लाल भल्ला, पुस्तकालय सचिव सुनीत व्यास और अध्यक्ष हरिमोहन दास टंडन के चित्रों पर माल्यार्पण और दीप जलाकर की। इसके बाद पुस्तकालय की पत्रिका का विमोचन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति गिरधर मालवीय ने पुस्तकालय की महत्ता पर प्रकाश डाला। स्वागत पुस्तकालय संयोजन समिति सचिव डॉ. मुक्ति व्यास और डॉ. केपी भल्ला ने किया। संचालन डॉ. राम नरेश त्रिपाठी ने किया। इलाहाबाद डिग्री कॉलेज की छात्राओं ने राष्ट्रीय गीत, सरस्वती वंदना और स्वागत गीत प्रस्तुत किया। इस दौरान मंडलायुक्त बीके सिंह, जिलाधिकारी भवनाथ सिंह, अपर जिलाधिकारी श्रीकृष्ण, एसपी सिटी राजेश यादव, डॉ. केपी भल्ला, डॉ. अतुल कुमार, स्वतंत्र पांडेय, डॉ. आनंद शंकर, डॉ. एनसी अग्रवाल, लालजी मिश्रा, अजय सिंह, सत्येंद्र चोपड़ा, हरीश मालवीय आदि रहे।
कार्यक्रम के सिलसिले में पहुंचे राज्यपाल राम नाईक ने सोमवार को महामना मदन मोहन मालवीय की जन्मस्थली को देख अभिभूत हो गए। यहां उन्होंने महामना की तस्वीर पर माल्यार्पण किया। कहा ‘मैं बहुत भाग्यशाली हूं कि मुझे महामना की जन्मस्थली को नमन करने का अवसर मिला है।’