निजी कार और दूसरे वाहनों से टैक्सी का काम पूरे शहर में खुलेआम लिया जा रहा है। यह बड़ा खेल परिवहन विभाग और पुलिस के सामने चल रहा है, लेकिन कार्रवाई के बारे में पूछने पर विभागीय रिकॉर्ड पूरी तरह खाली मिलता है। सिविल लाइंस स्थित क्षेत्रीय पर्यटन कार्यालय और रोडवेज बस अड्डे के आसपास निजी कारों को टैक्सी बनाकर उनमें सवारियां बैठाते सुबह से शाम तक कभी भी देखा जा सकता है। वहीं, विभाग की ओर से जनवरी से मई 2026 तक ऐसे किसी भी वाहन का न तो चालान किया गया और न ही कोई वाहन सीजकर जुर्माना वसूला गया।
सोमवार से शुक्रवार तक शहर में करीब 200 निजी वाहन प्रतिदिन प्रयागराज से लखनऊ, वाराणसी, रीवा, मैहर और चित्रकूट जैसे शहरों के लिए टैक्सी की तरह संचालित हो रहे हैं। नियमों के अनुसार बिना वैध टैक्सी परमिट के किसी भी निजी वाहन से व्यावसायिक रूप से सवारी ढोना प्रतिबंधित है, लेकिन इस अवैध कारोबार पर कोई रोक संगमनगरी में नहीं है। इससे न केवल सड़क परिवहन निगम को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, बल्कि यात्रियों का शोषण भी हो रहा है। क्षेत्रीय पर्यटन ऑफिस की एक अधिकारी का कहना है कि निजी वाहन रोजाना सुबह से उनके कार्यालय के गेट के सामने खड़े रहते हैं, जिससे पर्यटकों को आने-जाने में परेशानी होती है।