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Transport Department : निजी कार से टैक्सी का काम, न जुर्माने की वसूली न ही चालान

Thu, 25 Jun 2026 05:50 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

निजी कार और दूसरे वाहनों से टैक्सी का काम पूरे शहर में खुलेआम लिया जा रहा है। यह बड़ा खेल परिवहन विभाग और पुलिस के सामने चल रहा है, लेकिन कार्रवाई के बारे में पूछने पर विभागीय रिकॉर्ड पूरी तरह खाली मिलता है।
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गाड़ी का चालान। सांकेतिक चित्र - फोटो : संवाद।
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विस्तार
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निजी कार और दूसरे वाहनों से टैक्सी का काम पूरे शहर में खुलेआम लिया जा रहा है। यह बड़ा खेल परिवहन विभाग और पुलिस के सामने चल रहा है, लेकिन कार्रवाई के बारे में पूछने पर विभागीय रिकॉर्ड पूरी तरह खाली मिलता है। सिविल लाइंस स्थित क्षेत्रीय पर्यटन कार्यालय और रोडवेज बस अड्डे के आसपास निजी कारों को टैक्सी बनाकर उनमें सवारियां बैठाते सुबह से शाम तक कभी भी देखा जा सकता है। वहीं, विभाग की ओर से जनवरी से मई 2026 तक ऐसे किसी भी वाहन का न तो चालान किया गया और न ही कोई वाहन सीजकर जुर्माना वसूला गया।

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सोमवार से शुक्रवार तक शहर में करीब 200 निजी वाहन प्रतिदिन प्रयागराज से लखनऊ, वाराणसी, रीवा, मैहर और चित्रकूट जैसे शहरों के लिए टैक्सी की तरह संचालित हो रहे हैं। नियमों के अनुसार बिना वैध टैक्सी परमिट के किसी भी निजी वाहन से व्यावसायिक रूप से सवारी ढोना प्रतिबंधित है, लेकिन इस अवैध कारोबार पर कोई रोक संगमनगरी में नहीं है। इससे न केवल सड़क परिवहन निगम को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, बल्कि यात्रियों का शोषण भी हो रहा है। क्षेत्रीय पर्यटन ऑफिस की एक अधिकारी का कहना है कि निजी वाहन रोजाना सुबह से उनके कार्यालय के गेट के सामने खड़े रहते हैं, जिससे पर्यटकों को आने-जाने में परेशानी होती है।

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केस-1

कुछ दिन पूर्व की बात है। बेनीगंज निवासी केदारनाथ कनौजिया को लखनऊ जाना था। वह ई-रिक्शा से बस अड्डे जा रहे थे। आरोप है कि रास्ते में ई-रिक्शा चालक ने यह कहकर उन्हें एक निजी कार में बैठा दिया कि यह जल्दी लखनऊ पहुंचा देगी। केदारनाथ के अनुसार शाम सात बजे कार में बैठने के बाद चालक सवारी भरने के लिए एक घंटे तक इंतजार करता रहा। देर रात वाहन चला भी तो उन्हें लखनऊ शहर पहुंचाने के बजाय पीजीआई के आगे एक जगह छोड़ दिया गया।

केस-2

रायबरेली के मूल निवासी और रेलवे कॉलोनी में रहने वाले निवासी संतोष अग्रवाल को जरूरी काम से लखनऊ जाना था। वह सिविल लाइंस क्षेत्र से एक निजी कार में बैठ गए। उनका आरोप है कि चालक डेढ़ घंटे तक अन्य सवारियों का इंतजार करता रहा। पर्याप्त सवारी न मिलने पर यात्रा रद्द कर दी। ऐसे वाहन हनुमान मंदिर, पर्यटन कार्यालय और रोडवेज परिसर के आसपास रोजाना खड़े दिखाई देते हैं।

यूनियन ने भी माना यह है अवैध संचालन

टेंपो-टैक्सी व ई-रिक्शा यूनियन के अध्यक्ष विनोद दूबे का कहना है कि निजी वाहनों से सवारी ढोना पूरी तरह अवैध है। रोडवेज बस अड्डे के एक किलोमीटर के दायरे में इस तरह का संचालन नियमों के विपरीत है। लेकिन, इन पर कोई रोक नहीं लग रही।

प्राइवेट टैक्सी से सवारी ढोना अवैध है। ऐसे वाहनों के खिलाफ समय-समय पर कार्रवाई की जाती है। जल्द आप देखेंगे कि विशेष अभियान चलाकर अवैध रूप से सवारी ढोने वाले वाहनों पर कार्रवाई हो रही है। - एसपी सिंह, आरटीओ (प्रवर्तन), प्रयागराज
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