उत्तर मध्य रेलवे के झांसी वैगन मरम्मत कारखाने ने ट्रेन मैनेजरों (गार्ड) के काम को आसान और सुरक्षित बनाने के लिए संशोधित ब्रेक वैन (बीवीजेडआई एवं बीवीसीएम) का पहला सफल प्रोटोटाइप विकसित किया है। वर्षों पुरानी मांग पूरी होने से रेल कर्मचारियों में खुशी की लहर है। इस नवाचार को देखते हुए रेलवे बोर्ड ने पूरे देश में सभी जोनल रेलों को इस नए मॉडल के तहत ब्रेक वैनों (मालगाड़ी में ट्रेन मैनेजरों के बैठने वाला कोच) के अपग्रेडेशन का आधिकारिक निर्देश जारी कर दिया है।
नए सिरे से डिजाइन किए गए इस ब्रेक वैन में ट्रेन मैनेजरों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा गया है। इसमें 360-डिग्री घूमने वाली गद्देदार कुर्सी और फुट रेस्ट लगाया गया है, जिससे ड्यूटी के दौरान निगरानी करना आसान होगा। बिजली की निर्बाध आपूर्ति के लिए सोलर पैनल और लिथियम फेरो फॉस्फेट बैटरी की व्यवस्था की गई है। इससे पंखे और लाइटें लगातार काम करेंगी। इसके अलावा केबिन के अंदर एपॉक्सी रेजिन फ्लोरिंग, आधुनिक कमोड (शौचालय) , वॉकी-टॉकी स्टैंड, बोतल होल्डर, कोट हुक और यूनिवर्सल लॉक जैसी जरूरी सुविधाएं जोड़ी गई हैं।
उत्तर मध्य रेलवे महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह ने इस प्रोजेक्ट की व्यक्तिगत रूप से निगरानी की। उन्होंने झांसी कारखाने की टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ट्रेन संचालन में संरक्षा सुनिश्चित करने में ट्रेन मैनेजरों की भूमिका बेहद अहम होती है। सीपीआरओ डा. शिवम शर्मा ने बताया कि इस नए बदलाव से मालगाड़ी के ट्रेन मैनेजरों की कठिन कार्य परिस्थितियों में बड़ा सुधार आएगा और उनका सफर ज्यादा आरामदायक बनेगा। इस तरह के ब्रेक वैन बनाने का झांसी कारखाने का आर्डर भी मिला है।