prayagraj news : माघ मेले की तैयारी जोरशोर से चल रही है।
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मायामोह त्याग तक तपस्या के लिए दंड धारण करने वाले दंडी संन्यासियों में माघ मेला में भूमि सुविधा के लिए लोभ जाग गया है। दो धड़ों में बंटे दंडीबाड़ा के संन्यासियों ने राजसी वैभव वाली सुविधा के लिए अलग-खींचतान शुरू कर दी है। एक गुट ने 115 बीघा भूमि मांगी है, तो दूसरे गुट ने 130 बीघा भूमि मेलाधिकारी से मांगी है। जबकि दंडी बाड़े को 80 बीघा ही भूमि दी जाती रही है।
माघ मेला के लिए भूमि सुविधाओं का आवंटन अभी शुरू नहीं हुआ है। लेकिन, पखवारे भर पहले से ही शंकराचार्यों, आध्यात्मिक संस्थाओं की ओर से भूमि आवंटन के लिए मेला प्रशासन को मांग पत्र भेजा जा रहा है। इस बीच संगम की रेती पर बसने वाली गिनती की बड़ी आध्यात्मिक संस्थाओं में से एक दंडीबाड़ा के दो धड़े इस बार भूमि सुविधा के लिए आगे आए हैं।
पिछले माघ मेले में अगल होकर गठित किए गए अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के अध्यक्ष स्वामी ब्रह्माश्रम महाराज ने इस बार 115 बीघा भूमि मेला प्रशासन से मांगी है। उनका कहना है कि कोविड-19 की वजह से इस बार दूर-दूर शिविर लगाए जाएंगे। ऐसे में उनको दंडीबाड़ा बसाने के लिए अधिक जमीन चाहिए।
उधर, सलाहकार समिति की बैठक में न बुलाए जाने से नाराज अखिल भारतीय दंडी संन्यासी प्रबंधन समिति (दंडीबाड़ा)दंडी स्वामी नगर के अध्यक्ष स्वामी बिमल देव आश्रम ने मेलाधिकारी से 130 बीघा भूमि की मांग की है। स्वामी बिमल देव ने बताया कि पिछली बार की स्थिति कुछ और थी। कोरोना काल में दंडाबाड़ा की 127 से अधिक संस्थाओं को बसाने के लिए भूमि सुविधा बढ़ाई जानी चाहिए। उल्लेखनीय है कि पिछली बार माघ मेले में स्वामी बिमल देव पर कई संस्थाओं की भूमि दबाने और उस पर अपने खास लोगों को बसाने का आरोप लगाया गया था।