साइबर सेल जांच में जुटी
कुछ देर बाद दोबारा फोन आया। इस बार महंत के पूछने पर फोन काट दिया जाता है। थोड़ी देर बाद एक अन्य नंबर से कॉल आई, जिसमें वह अपना नाम प्रवीण बताता है। जब उससे पूछा जाता है कि किस प्रकार का सहयोग मांग रहे हो, तो वह फिर फोन काट देता है।
मामला संदिग्ध लगने पर इस मामले की लिखित शिकायत कीडगंज थाने में की गई। जिस पर धोखाधड़ी की धाराओं में अज्ञात में एफआईआर दर्ज कर ली गई। डीसीपी नगर अभिषेक भारती ने बताया कि मामले में साइबर सेल व साइबर थाना की भी मदद ली जा रही है। जांच पड़ताल चल रही है और उन नंबरों से घटना में शामिल लोगों को ट्रेस करने का प्रयास किया जा रहा है।
दो साल पहले भी सामने आया था मामला, दो गए थे जेल
पुलिस व प्रशासनिक अफसरों के सीयूजी नंबर का इस्तेमाल कर धोखाधड़ी का यह जिले में पहला मामला नहीं है। दो साल पहले अगस्त 2022 में ऐसा ही मामला सामने आया था जिसमें मेजा थाने से दो युवक श्यामेंद्र उपाध्याय व अंकित शुक्ला गिरफ्तार कर जेल भेजे गए थे। पूछताछ में उन्होंने बताया था कि वह एक मोबाइल एप के जरिए कमिश्नर, एसएसपी, डीएम के नंबर का इस्तेमाल कर मातहत अधिकारियों पर रौब झाड़ते व अपने काम कराते थे। उन्होंने न सिर्फ अफसरों बल्कि ऊर्जा मंत्री बनकर विद्युत विभाग के अधिकारियों पर दबाव डालकर काम कराए थे।