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कांवड़िये आज करेंगे भोले का जलाभिषेक

Mon, 30 Jul 2018 02:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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सावन की शुरुआत के साथ ही भोले के पूजन-अर्चन, अभिषेक  का क्रम आरंभ हुआ लेकिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ सावन केपहले सोमवार को उमडे़गी। भोले के भक्त कांवड़िये भी गंगा, संगम से जल भरकर शिव का अर्चन-अभिषेक करेंगे। भोले के  दरबार में जुटने वाले श्रद्धालुओं के मद्देजनर पड़िला महादेव से लेकर सोमेश्वर मंदिर तक और मनकामेश्वर मंदिर, नागवासुकि मंदिर, दशाश्वेध मंदिर, तक्षकतीर्थ-बड़ा शिवाला आदि शिवालयों में खास तैयारियां की गई हैं।
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साफ-सफाई, रंगाई-पुताई के अतिरिक्त भोले के द्वार तक जाने के लिए छाजन और बैरीकेडिंग लगाई गई है। मंदिरों को बिजली की झालरों और फूलों से सजाया गया है। शिवालयों में रुद्राभिषेक सहित विविधतापूर्ण धार्मिक अनुष्ठान होंगे। बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत रखेंगे तो घरों में भी कीर्तन दरबार सजेगा। वहीं परंपरागत रूप से प्रत्येक सोमवार को सीएमपी डिग्री कॉलेज के सामने से मेडिकल कॉलेज चौराहा तक होने वाली गहरेबाजी प्रतियोगिता के लिए गहरेबाजों ने जमकर तैयारी की है।

मनकामेश्वर मंदिर में जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में लुटिया उपलब्ध रहेगी तो दरियाबाद स्थित तक्षक तीर्थ बड़ा शिवाला में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर की ओर से भी फूल-दूध, बेलपत्र, धतूरा आदि पूजन सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। तक्षकतीर्थ पीठाधीश्वर रविशंकर के मुताबिक प्रतिदिन रुद्राभिषेक होंगे पर सोमवार को सामूहिक रूप से महारुद्राभिषेक कराया जाएगा। पहले सोमवार पर गंगाजल, तीसरे पर गंगाजल तथा दूध और दूसरे तथा चौथे सोमवार को गन्ने के रस और दूध से रुद्राभिषेक किया जाना फलदायी है। दारिद्रय और रोग नाश के लिए सावन के प्रत्येक शनिवार को सरसों के तेल से रुद्राभिषेक शुभतादायी होगा।
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सावन के पहले सोमवार को भोले बाबा के दर्शन-पूजन, अर्चन-अभिषेक के लिए कांवड़िये आतुर, उत्साहित हैं। शहर और आसपास के शिवालयों में तो सोमवार को जलाभिषेक करेंगे लेकिन बाबा धाम, बाबा विश्वनाथ सहित दूरदराज के शिवालयों में जलाभिषेक के लिए कांवड़िए रविवार को ही जल भरकर भोले के धाम के लिए रवाना हुए। हालांकि पाचक के कारण दारागंज के गंगा भवन के पास कांवड़ियों की संख्या कम ही दिखी लेकिन जल भरकर जाने वालों में महिला कांवड़िया भी रहीं। गंगाभवन के पास से ही उन्होंने अपनी पसंद के केसरिया कपड़े खरीदे, साथ ही कांवड़ का सामान भी।

कांवड़ियों ने स्नान ध्यान पूजन कर अपने पात्र में जल भरकर पूजन का संकल्प लिया और जयकारों के साथ चल पड़े। बसों, ट्रेनों सहित अन्य साधनों से भी दूर दराज के शिवालयों तक जाने वाले कांवड़िये पूर्व संध्या पर ही निकल पड़े। वैसे कांवड़ियों की मुश्किलें अब भी कम नहीं हो रही हैं। बारिश और जगह-जगह निर्माणाधीन सड़कों के कारण नंगे पांव चलना अतिरिक्त कष्टदायी रहा। गंगा भवन के पास कीचड़ के कारण मीरा मार्ग से लेकर दशाश्वमेध घाट तक निर्माणाधीन सड़क की सामग्री, गिट्टी फैली रही। घाटों पर बालू की बोरियां अब भी जस की तस पड़ी हैं। ऐसे में घाटों पर फिसलन बनी हुई है, जिससे यात्री फिसलते रहे। सुरक्षा व्यवस्था के लिए घाटों पर अब तक महिला-पुरुष सिपाहियों का कोई इंतजाम नहीं दिखा।

अब पहले जैसी बात तो नहीं रही लेकिन बड़े-बड़े घरों के बरामदे या फिर लॉन में झूले डाले जाएंगे। लेडीज क्लब, इनरव्हील सहित अन्य महिला संगठनों की ओर से सावन के उत्सव को मनाने के लिए ‘कजरी संध्या’, मेहंदी रचो प्रतियोगिता जैसे कार्यक्रम होंगे। चौक गंगादास स्थित राधारमण मंदिर सहित शहर में राधा-कृष्ण के अन्य मंदिरों में झूला महोत्सव की धूम रहेगी।

सावन के पहले सोमवार के साथ सीएमपी डिग्री कालेज से लेकर मेडिकल चौराहे तक इक्का दौड़ यानी गहरेबाजी का रोमांच दिखेगा। इसके तहत गोपाल महराज के चेतक, प्रवीन पाठक के लाल बादशाह, विष्णु महराज के राकेट, शेरअली के तूफान, बदरेआलम के रुस्तम सहित सादिक सिविल लाइंस, गुड्डू चकिया, पप्पू बेली आदि के घोड़ों का जलवा दिखेगा। प्रयाग गहरेबाजी संघ के बनवारी पाठक के मुताबिक प्रशासन ने शाम 5.30 बजे से 6.30 बजे तक तकरीबन एक घंटे तक समय निश्चित किया है। इस बीच इस रास्ते से आवागमन पर रोक रहेगी।
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