माघी पूर्णिमा पर शनिवार को गंगा, यमुना, विलुप्त सरस्वती के संगम में देश के कोने-कोने से आए संत-भक्त पुण्य की डुबकी लगाएंगे। इसी केसाथ शिविरों में कीर्तन, कथाओं, यज्ञ, अनुष्ठानों की पूर्णाहुति हो जाएगी। साथ ही कामनाओं, संकल्पों की पूर्ति के लिए संगम की रेती पर मास पर्यंत कल्पवास पूरा हो जाएगा। इसी के साथ कर संत-भक्त विदा हो जाएंगे। स्नान पर्व को देखते हुए मेला प्रशासन ने संगम समेत गंगा के आठ घाटों पर तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। माघी पूर्णिमा स्नान का शास्त्रों और पुराणों में विशेष महत्व है। मान्यता है कि भगवान विष्णु स्वयं इस दिन गंगा में डुबकी लगाते हैं।