मामला प्रयागराज के थाना मांडा के गोरखाडीह गांव का है। लेखपाल रामबरन मेरुआडीह क्षेत्र में 27 दिसंबर 1991 को पैमाइश के लिए गए थे। उसी दाैरान कुछ ग्रामणों ने आपत्तियां उठाईं। वह सभी चकरोड पर मिट्टी डालने के खिलाफ उसकी कार्यवाही से नाराज थे।
अदालती भागदौड़ से थक चुके आरोपी ने 33 साल बाद जुर्म कबूल कर लिया कि उसने लेखपाल को जातिसूचक गालियां दी थीं। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने आरोपी को 1500 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। यह फैसला मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नूतन चाैहान की अदालत ने दिया।
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मामला प्रयागराज के थाना मांडा के गोरखाडीह गांव का है। लेखपाल रामबरन मेरुआडीह क्षेत्र में 27 दिसंबर 1991 को पैमाइश के लिए गए थे। उसी दाैरान कुछ ग्रामणों ने आपत्तियां उठाईं। वह सभी चकरोड पर मिट्टी डालने के खिलाफ उसकी कार्यवाही से नाराज थे। अगले दिन जब लेखपाल तहसील पर आख्या तैयार कर रहे थे। इसी बीच आरोपी मुरारी, रामसकल व केशव मौके पर पहुंचे और सरकारी काम में बाधा पैदा करते हुए जातिसूचक गालियां देने लगे। जान से मारने की धमकी भी दी।
लेखपाल की तहरीर पर 33 साल पहले दर्ज मामले में सभी आरोपियों ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इन्कार कर दिया था। इसी बीच 2006 में मुरारी और 2021 में केशव की माैत हो गई। अकेले बचे रामसकल ने 16 दिसंबर को कोर्ट में पेश होकर जुर्म कुबूल कर लिया। कहा कि अदालती दौड़भाग से वह थक चुका है। कोर्ट ने अर्थदंड लगा कर मुकदमा खत्म कर दिया। अर्थदंड अदा नहीं करने पर आरोपी को एक माह जेल में बिताना होगा।