टिड्डियों के दल ने बुधवार को यमुनापार में एक बार फिर हमला बोल दिया। इस बार एक नहीं तीन दल एक साथ पूरे यमुनापार में मंडराते रहे। हालांकि, दो दलों के मिर्जापुर क्षेत्र में चले जाने की बात कही जा रही है। एक दल ने शंकरगढ़ के पिपरांव गांव में डेरा डाल दिया था। पूरी टीम के साथ अफसर भी वहां पहुंच गए थे तथा दवाओं के छिड़काव की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। इन दिनों धान की नर्सरी तैयार हो रही है। टिड्डियों की वजह से नर्सरी समेत अन्य फसलों को काफी नुकसान की आशंका बन गई है। इससे किसानों में दहशत है।
मध्य प्रदेश के रीवा जिले की तरफ से टिड्डियों के तीन दल ने दिन में प्रवेश किया। देर शाम तक वे पूरे कोरांव, शंकरगढ़, मेजा, करछना, जसरा आदि क्षेत्रों में मंडराते रहे। वे जमीन पर न बैठने पाएं इसके लिए ग्रामीण लगातार ढोल, थाली, डीजे आदि बजाते रहे। इनमें से एक दल के शाम को ही भदोही होते हुए मिर्जापुर के जंगल में जाने की सूचना है। एक बड़े दल के कोरांव के बदौर खंडेहरा और तरांव के बीच होने की सूचना रही लेकिन रात मेें अफसर बचाव टीम के साथ वहां पहुंचे तो टिड्डी वहां नहीं थे।
जिला कृषि अधिकारी अश्वनी कुमार सिंह ने बताया कि इस दल के भी मिर्जापुर की सीमा में जाने की सूचना है। हालांकि, बारिश तथा रात में अंधेरा होने की वजह से कुछ दिख नहीं रहा था। ऐसे में उनके यमुनापार के ही किसी अन्य गांव में होने की भी आशंका बनी हुई है। टिड्डियों के एक अन्य दल ने जसरा ब्लाक के असरवई एवं पिपरांव गांव के बीच डेरा डाल दिया है। इससे धान की नर्सरी और अन्य फसलों को काफी नुकसान की आशंका बन गई है। टिड्डियों पर रसायनों के छिड़काव के लिए टीम पहुंच गई थी। इसके लिए फायर ब्रिगेड गाड़ियां, टैंकर, छिड़काव वाले अन्य उपकरण लगाए गए हैं। उप कृषि निदेशक विनोद कुमार ने बताया कि टिड्डियों को पूरी तरह से नष्ट करने का लक्ष्य रखा गया है।
अभी अन्य दल का बना हुआ है खतरा
टिड्डियों का आगे भी खतरा बना हुआ है। मिर्जापुर में प्रवेश करने वाले दोनों दलों के यहां आने की आशंका बनी हुई है। इसके अलावा कई अन्य दल राजस्थान और मध्य प्रदेश में अब भी सक्रिय हैं। उनके भी यहां आने की आशंका बनी हुई है। उप निदेशक कृषि विनोद कुमार का कहना है कि 15 जुलाई तक यह खतरा बना रहेगा।