तीन साल तक पॉलिसी चलने के बाद बीमा कंपनियां भुगतान में आनाकानी नहीं कर सकेंगी। बीमाधारक ने यदि कोई जानकारी छिपाई है तो इसकी पड़ताल कंपनी को तीन साल के भीतर कर लेनी होगी। अन्यथा, इसके बाद उन्हें भुगतना करना ही होगा। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मोतीलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड एडमिनिस्ट्रेशन (मोनिरबा) के 50 वर्ष पूरे होने पर मंगलवार से शुरू व्याख्यान श्रृंखला में बतौर मुख्य वक्ता पहुंचे एसबीआई लाइफ के प्रबंध निदेशक अरिजीत बसु ने प्रेसवार्ता में बीमा विधेयक तथा बीमा कंपनियाें की भावी योजनाओं पर चर्चा की।
उन्होंने बताया कि अभी फ्राड सामने आने के बाद कंपनियां किसी भी स्तर पर भुगतान रोक सकती हैं लेकिन बीमा विधेयक में ग्राहकों को यह सुरक्षा प्रदान की गई है। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में इंश्योरेंस मार्केटिंग फर्म बीमा क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभाएंगे। एजेंट तो रहेंगे ही, फर्म भी खुलेंगे। उन्होंने बताया कि फर्म खोलने के लिए कुछ शर्तें होंगी लेकिन प्रक्रिया काफी आसान होगी। उन्होंने बताया कि विधेयक लागू होता है तो पॉलिसी के एवज में मिलने वाला कमीशन स्ट्रक्चर तय करने का अधिकार भी आईआरडीए को मिल जाएगा।
अभी यह एलआईसी ऐक्ट का हिस्सा है। 49 फीसदी विदेशी कंपनियों के शेयर की बाबत बसु ने कहा कि फिलहाल दो-तीन साल तो एसबीआई लाइफ जैसी बड़ी संस्थानों को बहुत कुछ नहीं करना पड़ेगा लेकिन इसके बाद कैपिटल बढ़ाने की चिंता होगी। इसके लिए विदेशी कंपनियों से समझौता करना पड़ेगा। इसके बाद मोनिरबा में आयोजित व्याख्यान में बसु ने बीमा क्षेत्र के भविष्य, संभावनाओं और भावी योजनाओं के बारे में विद्यार्थियों को विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने संस्थान के भावी प्रबंधकों को बीमा क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं के बारे में भी बताया।
बीमा क्षेत्र में विस्तार के लिए तैयार एसबीआई लाइफ की नजर बैंक के खाताधारकों पर है। एसबीआई की देश में तकरीबन 15 हजार शाखा हैं। एसबीआई लाइफ के प्रबंध निदेशक अरिजीत बसु ने बताया कि अभी तकरीबन तीन हजार शाखा में बीमा की सुविधा है।उनकी कोशिश हर शाखा तक पहुंचने की है। उन्होंने बताया कि अधिक संभावना वाली 400 शाखाएं चिह्नित भी की गई हैं। हर शाखा में एसबीआई लाइफ का प्रतिनिधि सपोर्ट के लिए मौजूद रहेगा। उनका दावा है कि अधिक से अधिक पॉलिसी कराने के दबाव में एजेंट ग्राहकों को अंधेरे में नहीं रख सकेंगे। कंपनी की ओर से प्री इशुएंस वेलकम काल की सेवा की शुरुआत की गई है। पॉलिसी करने से पहले एसबीआई लाइफ की ओर से ग्राहक को फोन किया जाता है और उन्होंने जिस पॉलिसी के लिए आवेदन किया है उसकी पूरी जानकारी दी जाती है। यदि बीमाधारक को किसी बिंदु पर आपत्ति है तो वे पॉलिसी बदल सकते हैं या बीमा कराने से मना कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि एसबीआई लाइफ के बिजनेस में 25 फीसदी का ग्रोथ हुआ है। उन्होंने कंपनी की अन्य योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी।