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प्रयागराज : तीन मासूमों के आंसुओं ने रोक दी नॉन-स्टॉप ट्रेन, छिवकी में मां से मिलते ही भावुक हुआ पूरा परिवार

Sun, 13 Sep 2026 06:52 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

काशी दर्शन के बाद घर लौट रहे आंध्र प्रदेश के परिवार की खुशियां उस वक्त मातम में बदल गईं, जब भीड़ के बीच तीन मासूम बच्चियां मां से बिछड़कर गलती से दूसरी ट्रेन में सवार हो गईं। ट्रेन में रोती-बिलखती बच्चियों पर मुख्य टिकट निरीक्षक देव प्रकाश वर्मा की नजर पड़ी तो उन्होंने तुरंत मदद का हाथ बढ़ाया। कमर्शियल कंट्रोलर मिथिलेश कुमार की सूझबूझ से नॉन-स्टॉप भुवनेश्वर-आनंद विहार सुपरफास्ट को प्रयागराज छिवकी स्टेशन पर विशेष रूप से रुकवाया गया।

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मां-बाप से बिछड़ी तीन बच्चियों को रेलवेकर्मियों की सतर्कता की वजह से वापस उनके मां से मिलाया गया। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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काशी दर्शन के बाद खुशियों भरा सफर अचानक तब मातम और लाचारी में बदल गया, जब भीड़भाड़ के बीच आंध्र प्रदेश के एक परिवार के तीन मासूम बच्चिया माता-पिता से बिछड़कर गलती से नॉन-स्टॉप भुवनेश्वर-आनंद विहार सुपरफास्ट एक्सप्रेस में सवार हो गए। डिब्बे में रोते-बिलखते बच्चों पर जब मुख्य टिकट निरीक्षक देव प्रकाश वर्मा की नजर पड़ी, तो रेलवे की संवेदनशीलता ने एक नई मिसाल पेश की। कमर्शियल कंट्रोलर मिथिलेश कुमार की सूझबूझ से बिना ठहराव वाली इस ट्रेन को प्रयागराज छिवकी स्टेशन पर विशेष रूप से रुकवाया गया।

जिगर के इन टुकड़ों को जब सुरक्षित नीचे उतारकर दूसरी ट्रेन से पहुंची मां की आंचल में सौंपा गया, तो मां की नम आंखें और परिवार की सिसकियां देख हर किसी का दिल पसीज गया। रेलवे कर्मियों की इस मानवीय पहल ने साबित कर दिया कि तकनीक और नियमों से ऊपर भी इंसानियत का एक मुकम्मल जहान होता है।दरअसल आंध्र प्रदेश का रहने वाले लक्ष्मी राज का परिवार काशी दर्शन के बाद पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन (डीडीयू) से गाड़ी संख्या 12321 मुंबई मेल द्वारा मुंबई जाने के लिए स्टेशन पहुंचा था।

 

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भीड़ की वजह से दूसरी ट्रेन में हो गईं सवार

इसी दौरान भीड़भाड़ की वजह से तीनों बच्चियां जिनकी उम्र 09, 12 एवं 14 वर्ष की है वह अपने माता-पिता से बिछड़कर गलती से दूसरी गाड़ी संख्या 22805 भुवनेश्वर-आनंद विहार सुपरफास्ट एक्सप्रेस में सवार हो गईं। जब यह ट्रेन आगे बढ़ी तो कोच एस-6 में ड्यूटी पर तैनात मुख्य टिकट निरीक्षक देव प्रकाश वर्मा की नजर इन बच्चों पर पड़ी, जो रोते-बिलखते हुए अपनी मां को याद कर रहे थे।

टीसी वर्मा ने तुरंत संवेदनशीलता दिखाते हुए बच्चों से पूरी जानकारी ली और बिना देर किए मंडल कार्यालय के कमर्शियल कंट्रोल में तैनात मिथिलेश कुमार को इसकी सूचना दी। कंट्रोल में बैठे मिथिलेश कुमार ने भी बिना वक्त गंवाए उच्च अधिकारियों से समन्वय स्थापित किया और उस ट्रेन का प्रयागराज छिवकी स्टेशन पर कोई ठहराव न होने के बावजूद विशेष व्यवस्था कर उसे वहां रुकवाया।

जैसे ही ट्रेन प्रयागराज छिवकी स्टेशन पर रुकी, पहले से वहां मौजूद रेलवे कर्मियों ने बच्चों को सुरक्षित नीचे उतारा। बाद में जब मुंबई मेल यहां पहुंची तो बच्चे उनकी मां के हवाले कर दिए। अपने जिगर के टुकड़ों को सही-सलामत वापस पाकर मां की आंखें नम हो गईं और पूरा परिवार भावुक हो उठा। आंध्र प्रदेश से आए इस परिवार ने रेलवे प्रशासन, मुख्य टिकट निरीक्षक देव प्रकाश वर्मा और कंट्रोलर मिथिलेश कुमार की तत्परता और मानवीय सोच की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए पूरी टीम का आभार व्यक्त किया।

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