भीड़ की वजह से दूसरी ट्रेन में हो गईं सवार
इसी दौरान भीड़भाड़ की वजह से तीनों बच्चियां जिनकी उम्र 09, 12 एवं 14 वर्ष की है वह अपने माता-पिता से बिछड़कर गलती से दूसरी गाड़ी संख्या 22805 भुवनेश्वर-आनंद विहार सुपरफास्ट एक्सप्रेस में सवार हो गईं। जब यह ट्रेन आगे बढ़ी तो कोच एस-6 में ड्यूटी पर तैनात मुख्य टिकट निरीक्षक देव प्रकाश वर्मा की नजर इन बच्चों पर पड़ी, जो रोते-बिलखते हुए अपनी मां को याद कर रहे थे।
टीसी वर्मा ने तुरंत संवेदनशीलता दिखाते हुए बच्चों से पूरी जानकारी ली और बिना देर किए मंडल कार्यालय के कमर्शियल कंट्रोल में तैनात मिथिलेश कुमार को इसकी सूचना दी। कंट्रोल में बैठे मिथिलेश कुमार ने भी बिना वक्त गंवाए उच्च अधिकारियों से समन्वय स्थापित किया और उस ट्रेन का प्रयागराज छिवकी स्टेशन पर कोई ठहराव न होने के बावजूद विशेष व्यवस्था कर उसे वहां रुकवाया।
जैसे ही ट्रेन प्रयागराज छिवकी स्टेशन पर रुकी, पहले से वहां मौजूद रेलवे कर्मियों ने बच्चों को सुरक्षित नीचे उतारा। बाद में जब मुंबई मेल यहां पहुंची तो बच्चे उनकी मां के हवाले कर दिए। अपने जिगर के टुकड़ों को सही-सलामत वापस पाकर मां की आंखें नम हो गईं और पूरा परिवार भावुक हो उठा। आंध्र प्रदेश से आए इस परिवार ने रेलवे प्रशासन, मुख्य टिकट निरीक्षक देव प्रकाश वर्मा और कंट्रोलर मिथिलेश कुमार की तत्परता और मानवीय सोच की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए पूरी टीम का आभार व्यक्त किया।