स्वरूपरानी नेहरू (एसआरएन) चिकित्सालय में डायलिसिस के लिए मरीजों को तीन-तीन महीने का इंतजार करना पड़ रहा है। मरीजों की संख्या के सापेक्ष बेड सीमित होने से स्थिति और खराब हो गई है।
एसआरएन अस्पताल में किडनी रोग विशेषज्ञ कई जिलों के मरीजों का इलाज करते हैं। अस्पताल में प्रतापगढ़, कौशाम्बी, चित्रकूट, बांदा, भदोही, मिर्जापुर, जौनपुर, मछली शहर व सुल्तानपुर व मध्य प्रदेश के रीवा से किडनी रोगी डायलिसिस कराने आते हैं।
वहीं, अस्पताल में डायलिसिस के सिर्फ नौ बेड हैं। यहां पर चार शिफ्ट में 36 मरीजों की डायलिसिस की जाती है। इसके बाद भी अधिकांश मरीजों को दो से तीन महीने तक स्लॉट नहीं मिल पाता। वर्तमान में 100 अधिक मरीजों की वेटिंग लिस्ट है।
मरीजों की समस्या को देखते हुए किडनी रोग विभाग की तरफ से मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज को डायलिसिस के बेड बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा गया था लेकिन जगह के अभाव में बेड नहीं बढ़े।
किडनी रोगियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। इस वजह से डायलिसिस में मरीजों की संख्या बढ़ी है। बेड बढ़ाने का प्रस्ताव एमएलएन मेडिकल कॉलेज प्रशासन को पूर्व में प्रस्ताव भेजा गया था। - डॉ. संतोष मौर्या, किडनी रोग विशेषज्ञ, एसआरएन अस्पताल।
डायलिसिस के बेडों की संख्या में इजाफा किया जाएगा। किडनी रोग विभाग की तरफ से बेड बढ़ाने का प्रस्ताव आया है। दो महीनों के भीतर संख्या बढा दी जाएगी। - डॉ. एके वर्मा, प्राचार्य, मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज।