हरेंद्र नागर के भाई रवींद्र ने 13 लोगों को खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया गया था। विवेचना के बाद सुंदर भाटी के अलावा सिंहराज, योगेश, विकास पंडित, कालू भाटी, दिनेश भाटी, अनूप भाटी, यतेंद्र चौधरी, सोनू, बॉबी उर्फ शेर सिंह, सुरेंद्र पंडित, ऋषिपाल और मनोज के आरोप पत्र दाखिल किया गया था। निचली अदालत में छह साल चले सत्र परीक्षण में 38 लोगों की गवाही के बाद सुंदर भाटी समेत 12 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। एक आरोपी को बरी कर दिया गया था। उम्रकैद की सजा के खिलाफ सभी ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। इसकी सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कुख्यात सुंदर भाटी, ऋषिपाल और सिंहराज की जमानत मंजूर कर ली।
कौन है सुंदर भाटी
दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए आतंक का पर्याय रहे ग्रेटर नोएडा के घंघौला गांव निवासी कुख्यात सुंदर भाटी का 30 साल का आपराधिक साम्राज्य है। राजनीतिक गलियारों में अच्छी पैठ थी। पैठ भी ऐसी कि वह जेल में रहने के दौरान खेल प्रतियोगिता में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर के साथ पुरस्कार बांटता था। जनवरी, 2015 में उसका गौतमबुद्धनगर जिला जेल के अंदर से फोटो वायरल हुआ था, जिसे जेल के एक अधिकारी ने ही भेजा था।
बुलंदशहर में ट्रांसपोर्ट का ठेकेदार था भाटी
जरायम की दुनिया में आने से पहले वह सुदंर भाटी बुलंदशहर का ट्रांसपोर्ट ठेकेदार हुआ करता था। इसी दौरान राजनेताओं से रिश्ते बढ़े तो राजनीतिक हत्याओं में हाथ आजमाने लगा। सुंदर की राजनीतिक महत्वाकांक्षा रही है। इसी बीच इसका साथी नरेश भाटी जिला पंचायत चेयरमैन बन गया। बाद में सुंदर ने चेयरमैन नरेश भाटी की हत्या कर दी थी। उसके बाद सुंदर ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह ताबड़तोड़ वारदात करता रहा। उसको पहली बार सजा 2015 में सपा नेता व प्रधान हरेंद्र नागर हत्याकांड में ही हुई।
सुंदर भाटी गिरोह की कार्यशैली
सुंदर भाटी गिरोह के गुर्गों का मुख्य कार्य रंगदारी वसूलना, सुपारी किलिंग , स्क्रैप के ठेके लेना, सरिया चोरी आदि था। पूर्वांचल की कई चर्चित हत्याओं में इस गिरोह का नाम चर्चा में आता रहा है।
सुंदर के इशारे पर अतीक के हत्यारों तक पहुंची जिगाना पिस्टल?
प्रयागराज में पुलिस अभिरक्षा में माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की शनिवार शाम गोली मारकर हत्या में भी सुंदर भाटी का नाम आया था। चर्चा थी कि सुंदर भाटी के इशारे पर अतीक-अशरफ की हत्या में गिरफ्तार लवलेश तिवारी, रोहित उर्फ सनी सिंह और अरुण मौैर्या तक जिगाना पिस्टल पहुंचाई गई थी। हालांकि, बाद में भाटी के हत्याकांड में परोक्ष-अपरोक्ष रूप से शामिल होने की पुष्टि नहीं हो सकी थी।