जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने निजी अस्पताल के डॉ.अरूप बनर्जी, डॉ. इशिता बनर्जी और डॉ. विवेक कुमार को इलाज में लापरवाही के लिए दोषी पाया है। इसके लिए इन्हें परिवादी महंत प्रकाश सिंह को आर्थिक व मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में छह लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। साथ ही परिवाद दाखिल करने की तिथि से अंतिम भुगतान तक आठ प्रतिशत की दर से वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
आयोग ने इसके अलावा 10 हजार रुपये वाद व्यय भी लगाया है। यह आदेश आयोग के अध्यक्ष मोहम्मद इब्राहीम, सदस्य प्रकाश चंद्र त्रिपाठी और सदस्या सरला की पीठ ने दिया है। धूमनगंज निवासी महंत प्रकाश सिंह ने आयोग में परिवाद दाखिल किया था। आरोप लगाया था कि पत्नी मालती सिंह को 19 नवंबर 2007 को सांस फूलने की शिकायत पर एक निजी अस्पताल ले गए थे। वहां डॉक्टरों ने बीएमवी ऑपरेशन की सलाह दी।
फरवरी 2008 को दिल्ली से बुलाए गए डॉ.विवेक कुमार व अन्य डॉक्टरों ने ऑपरेशन किया। इसके बाद मरीज को तेज बुखार आने लगा, लेकिन डॉक्टरों ने इसे सामान्य बताते हुए डिस्चार्ज कर दिया। इसके बाद मरीज को एसआरएन अस्पताल और फिर पीजीआई लखनऊ ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने बताया कि गलत ऑपरेशन की वजह से वाल्व में गंभीर इंफेक्शन हो गया है। इलाज के दौरान 21 मार्च 2008 को मरीज की मौत हो गई थी।
आयोग ने कहा कि ऑपरेशन के बाद मरीज की देखभाल की मुख्य जिम्मेदारी डॉक्टर की होती है। इसके बावजूद ऑपरेशन के तुरंत बाद डॉ.विवेक कुमार दिल्ली चले गए। इसके अलावा मुख्य चिकित्सा अधिकारी के पास पूर्व पंजीकरण कराए बिना राज्य के बाहर के डॉक्टर से ऑपरेशन कराना उच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन है। पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों के आधार पर उपभोक्ता आयोग ने माना कि गलत और इलाज में लापरवाही से महिला की मौत हुई।