रेमडिसिवर इंजेक्शन के बाद अब जिले में ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी का मामला सामने आया है। कोतवाली पुलिस ने तीन लोगों को रंगेहाथ गिरफ्तार र उनके कब्जे से पांच सिलेंडर बरामद किए हैं। इनमेें से एक भरा हुआ जबकि चार सिलेंडर खाली हैं। पकड़े गए लोगों से देर रात तक पूछताछ चलती रही।
कोरोना कॉल में इंजेक्शन व ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी की शिकायतें अफसरों तक लगातार पहुंच रही थीं। इसी को देखते हुए एसआरएन अस्पताल के आसपास कड़ी निगरानी रखने के लिए निर्देश दिए गए थे। इसी क्रम में कोतवली पुलिस को सूचना मिली कि कुछ लोग ऑक्सीजन सिलेंडर ज्यादा दाम में बेचने के लिए एसआरएन अस्पताल के पास पहुंचे हैं। जिस पर पुलिस ने एसओजी टीम संग मिलकर मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की तो एक कार में तीन लोग मिले जिनके कब्जे से पांच सिलेंडर भी मिले।
सिलेंडर के बाबत पूछने पर तीनों संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। जिसके बाद उन्हेें मयसिलेंडर कोतवाली थाने लाया गया। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में पता चला कि तीनों ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी का काम करते हैं। जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। इंस्पेक्टर कोतवाली ने बताया कि पकड़े गए लोगों में अनूप यादव पुत्र मदनजी यादव निवासी दोकटी बैरिया, मौजूदा पता खुल्दाबाद, बिलाल पुत्र नईम भडऱा चौराहा नैनी, सुरेंद्र पहवा पुत्र अशोक निवासी मीरापुर अतरसुइया शामिल हैं।
20 से 35 हजार में बेचते थे एक सिलेंडर
पुलिस के मुताबिक, पकड़े गए आरोपियों से प्रारंभिक पूछताछ में यह बात सामने आई है कि वह ऑक्सीजन सिलेंडर कई गुना ज्यादा दाम लेकर जरूरतमंदों को उपलब्ध कराते थे। वह सेटिंग के मुताबिक, एक सिलेंडर के एलि 20 से 35 हजार रुपये तक वसूलते थे। यह भी पता चला है कि बृहस्पतिवार को वह कुल पांच सिलेंडर लेकर आए थे जिनमें से चार सिलेंडर वह बेच चुके थे। भरा हुआ सिलेंडर देने के बाद वह लोगों से खाली सिलेंडर ले लेते थे और इसी क्रम में उनसे चार खाली सिलेंडर बरामद हुए। वह अंतिम भरा हुआ सिलेंडर भी बेचने की फिराक में थे और इसी दौरान उन्हें दबोच लिया गया। कोतवाली पुलिस देर रात तक उनसे पूछताछ में जुटी रही। पुलिस ने बताया कि मुकदमा लिखा जा रहा है।
प्लांट में भी थी सेटिंग
सूत्रों के मुताबिक, पकड़े गए तीनों आरोपियों से पूछताछ में जो बातें सामने आई हैं, उससे इस बात की भी आशंका है कि उनकी सेटिंग ऑक्सीजन प्लांट में भी थी। फिलहाल देर रात तक यह नहीं पता चल सका था कि वह किस प्लांट से ऑक्सीजन सिलेंडर लाते थे। दरअसल जानकारों का कहना है कि ऐसे वक्त में, जब ऑक्सीजन सिलेंडर बहुत आसानी से उपलब्ध नहीं है, पांच-पांच सिलेंडर लेकर उसे ब्लैक में बेचना बिना प्लांट कर्मचारियों की मदद के संभव नहीं है। पुलिस का कहना है कि पता लगाया जा रहा है कि आरोपी कहां से और कैसे ऑक्सीजन सिलेंडर हासिल करते थे।