बेरोजगारों से ठगी करने वाले गिरोह का सरगना शमीम अहमद खुद को हाईकोर्ट का डिप्टी रजिस्ट्रार बताकर बेरोजगारों को झांसा देता था। शमीम और उसके साथियों ने ठगी कर अकूत संपत्ति बनाई। करोड़ों की जमीन के साथ ही सोरांव में यामहा की एजेंसी भी ले ली। पिछले पांच छह सालों से गिरोह ने तकरीबन 14 सौ बेरोजगारों को नियुक्त पत्र और चयन घोषणा पत्र दिया था। शमीम ठगी के मामले पहले भी जेल जा चुका है।
एसटीएफ इस गिरोह के बारे में कुछ दिन पहले पता चला था। डिप्टी एसपी नवेंदु सिंह, इंस्पेक्टर अतुल सिंह और केसी राय को गिरोह के खुलासे में लगाया गया। पता चला कि शमीम अहमद इलाहाबाद हाईकोर्ट की कोआपरेटिव सोसाइटी में एकाउंटेंट के पद पर था। इसी का उसने फायदा उठाया और बाहर खुद को डिप्टी रजिस्ट्रार बताने लगा। अपने साथियों एमएनएनआईटी के असिस्टेंट प्राक्टर (स्टूडेंट एक्टिविटी एंड स्पोर्ट्स आफिसर) राघवेंद्र सिंह, रमेश यादव, हाईकोर्ट में सीसीटीवी और इंटरकाम का काम देखने वाले नीरज पराशर और मृत्युंजय सिंह के साथ मिलकर बेरोजगारों को इलाहाबाद और पटना उच्च न्यायालय के विभिन्न पदों पर नियुक्ति के नाम पर लाखों वसूलने लगे।
बेरोजगारों को नियुक्त पत्र दे दिया जाता। ज्वाइनिंग न होने से जब वह परेशान होते तो कुछ सफेदपोशों के माध्यम से उन्हें आश्वासन दिया जाता। गिरोह के लोग अपना अलग अलग क्लाइंट लाते थे। उनको इसी हिसाब से पैसे दिए जाते थे। धीरे-धीरे गिरोह का दायरा बढ़ा और लखनऊ का सुभाष यादव, मंझनपुर का कुलदीप और नई दिल्ली का रहने वाला नईम भी गिरोह में शामिल होकर बेरोजगारों को लाने लगे।
गिरोह ने हाईकोर्ट ही नहीं सेतु निगम समेत कई अन्य विभागों में भी नियुक्ति के लिए बेरोजगारों से लाखों रुपये ठगे हैं। एसटीएफ की जांच में अब तक 14 सौ बेरोजगारों को ठगने की सामने आई है। जांच चल रही है। अभी गिरोह के कई लोग नहीं मिले हैं। उनकी तलाश की जा रही है। उनके मिलने के बाद और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है। डिप्टी एसपी नवेंदु सिंह ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों की संपत्ति की जांच की गई तो करोड़ों के वारे न्यारे का खुलासा हुआ है। सिर्फ शमीम ने ही सोरांव कस्बे में देवास मोटर्स, देवास एसेसरीज और देवास यामहा एजेंसी खोली है। तमाम जमीनें भी उसने खरीदी हैं। गिरोह के खिलाफ शिवकुटी थाने में अभियोग पंजीकृत किया गया है।
दिल्ली से भगोड़ा घोषित है सरगना
मो. शमीम सिद्दीकी वर्षों से ठगी और जालसाजी के धंधे में जुटा हुआ है। वह फजी चिट फंट और फर्जी इंश्योरेंस कंपनी भी खोलकर लोगों को ठग चुका है। 1999 में दिल्ली में दिल्ली में फर्जी कंपनी बनाकर धोखाधड़ी करने के मामले में वह तिहाड़ जेल गया था। वहां जमानत के बाद कभी पेशी पर नहीं गया। इस कारण वह दिल्ली से भगोड़ा घोषित है।
एमएनएनआईटी से सस्पेंड चल रहा है राघवेंद्र
शमीम का मुख्य साथी एमएनएनआईटी का असिस्टेंट प्राक्टर राघवेंद्र सिंह 1999 में नियुक्त हुआ था। 2009 में माध्यमिक सेवा चयन बोर्ड का पर्चा लीक मामले में सहयोगियों समीर सिंह, अजय सिंह आदि के साथ सिविल लाइंस थाने से जेल गया था। जेल से छूटने के बाद वह उसने फिर कालेज ज्वाइन कर लिया और शमीम के संपर्क में आकर उसके साथ जुड़ गया। 2015 में अयोध्या में धोखाधड़ी के एक मामले में जेल जाने के बाद वह जमानत पर बाहर है। जेल जाने के कारण एमएनएनआईटी से वह निलंबित चल रहा है।
पांच सौ के 74 पुराने प्रतिबंधित नोट मिले
एसटीएफ ने गिरोह से भारी मात्रा में दस्तावेजों के साथ साथ एक लाख 30 हजार रुपये नकद भी बरामद किए हैं। इसके साथ ही पांच सौ के प्रतिबंधित 74 नोट (37 हजार रुपये) मिले हैं। इसके अलावा हाईकोर्ट का चयन घोषणा पत्र, नियुक्ति पत्र, अखबार में प्रकाशित विज्ञप्तियां, ओएमआर शीट, डिमांड ड्राफ्ट की फोटोस्टेट, अंकपत्र, प्रमाणपत्र, चेक, लेन देन के विवरण वाली डायरी, डिपार्टमेंटल, कांफिडेंशियल आर्डर, 12 बैंकों के चेक, तीन कारें, एक बाइक और सात मोबाइल आदि तमाम चीजें बरामद हुई हैं।