प्रयागराज। सिर पर गृहस्थी का सामान, पीठ और कंधों पर बच्चों को बिठाए हुए अपनों को संभालते, सहेजते प्रवासी मजदूरों की कतारें चिलचिलाती धूप में रविवार को शहर की सड़कों पर हर तरफ दिखाई पड़ी। रोजगार पर ताले और रोटियों के लाले पड़ने के बाद कोई बंगलूरू से चला आ रहा है तो कोई मुंबई और हैदराबाद से। हर तरफ मुसीबतें हैं और बेबसी का कोई अंत नहीं है। इस दिन हजारों की तादाद में आए प्रवासी मजदूरों को आसपास के इलाकों में जाने के लिए बसें तक नहीं मिलीं। पांवों में छाले लिए वो पीठ पर गृहस्थी की बोझ लिए भटकते रहे। लॉकडाउन में रुपये और अनाज खत्म होने के बाद देश के कोने-कोने से प्रवासी मजदूरों से प्रयागराज पहुंचने का सिलसिला रविवार को भी जारी रहा। बड़ी संख्या में मजदूर इस दिन देश के हर हिस्से से ट्रकों व अन्य निजी वाहनों से पहुंचे। हैदराबाद के अनंतपुरम में कारपेंटर का काम करने वाले गोरखपुर के जोखन व निजामुद्दीन अपने आठ साथियों के साथ ट्रक से उतरे। जोखन ने बताया कि सौ किमी का का किराया ट्रक वालों को कभी पांच सौ तो कभी एक हजार देकर आना पड़ा। अब यहां आते ही पुलिस वालों ने रास्ता रोक लिया। घर जाने के लिए कहीं बस नहीं मिल रही है। हालात के मारे प्रवासी मजदूरों की दुखती पीड़ा इसी तरह सड़कों पर भारी मन से घसीटती जा रही है। बंगलूरू में राजगीर मिस्त्री के तौर पर काम करने वाले फतेहपुर के कुसुंभी, बेर्राव, सुकैती गांवों के दीपक, बब्बू कुमार, शिवरतन, दिलीप, अनिल, शिरोमणि, नरेंद्र और संतोष भी ट्रक, डीसीएम से पांच दिन सफर करते हुए रविवार को यहां पहुंचे तो उन्हें पहले ब्वायज हाईस्कूल में ले जाकर थर्मल स्क्रीनिंग कराई गई। हालांकि उनके पास पहले से कोविड-19 निगेटिव का कार्ड भी थी, लेकिन उनकी दोबारा जांच कराई गई। फतेहपुर जाने के लिए वह शाम तक बसों की तलाश में भटकते रहे। इी तरह मुंबई में जूस बेचने और कैटरिंग का काम करने वाले कौशांबी के लवकुश, धीरेंद्र, विशाल और रोहित समेत उनके आठ साथी भी पीठ पर बैग लादे बस के लिए भटकते रहे। कोई उन्हें नैनी भेजता रहा तो कोई क्वारंटीन सेंटर। कोट प्रवासी मजदूरों को उनकी मंजिल तक पहुंचाने के लिए 550 बसें लगाई गई हैं। रेलवे स्टेशन के अलावा ब्वायज हाईस्कूल और नैनी में भी बसें लगाई गई हैं। सात ही चाकघाट से भी 40 बसों से प्रवासी मजदूरों को पहुंचाया जा रहा है। अधिक भीड़ होने पर कुछ लोगों को हो सकता है कि दूसरी जगह भेजा जा रहा है। सीबी राम, एआरएम, उत्तर प्रदेश परिवहन निगम प्रयागराज।